FDI in Insurance: केंद्रीय कैबिनेट ने बीमा क्षेत्र में एफडीआई सीमा 74% से बढ़ाकर 100% करने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी है, जिसे संसद के शीतकालीन सत्र (Winter Session) में पेश किया जाएगा. सरकार का मानना है कि इस कदम से बीमा क्षेत्र में निवेश (Investment) बढ़ेगा, नए खिलाड़ी आएंगे और उपभोक्ताओं को बेहतर व सस्ती सेवाएं मिलेंगी.
इंश्योरेंस सेक्टर में बड़ा सुधार
केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने फाइनेंशियल ईयर 2025–26 के बजट में यह प्रस्ताव रखा था, जिसके अनुसार बीमा कानून 1938 में संशोधन कर विदेशी निवेश को पूरी तरह खोल दिया जाएगा. अब तक बीमा क्षेत्र में 82,000 करोड़ रुपये का विदेशी निवेश आकर्षित किया जा चुका है, और नई नीति से यह आंकड़ा कई गुना बढ़ने की संभावना है.
इस विधेयक में न्यूनतम पूंजी प्रावधान घटाने, संयुक्त बीमा लाइसेंस की व्यवस्था और एलआईसी अधिनियम में बदलाव जैसे प्रावधान शामिल हैं. इससे एलआईसी के निदेशक मंडल को निर्णय लेने की अधिक स्वतंत्रता मिलेगी, खासकर शाखा विस्तार और मानव संसाधन प्रबंधन में.
इंश्योरेंस मार्केट में बढ़ेगी कंपीटीशन
सरकार का लक्ष्य 2047 तक “हर नागरिक के लिए बीमा” की योजना को साकार करना है, और यह सुधार उसी दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. इस बदलाव से रोजगार बढ़ने, बीमा बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने और वित्तीय सेवाओं में पारदर्शिता आने की उम्मीद है.
बीमा विधेयक में प्रस्तावित संशोधन मुख्य रूप से पॉलिसीधारकों के हितों को मजबूती देने, उनकी वित्तीय सुरक्षा बढ़ाने और बीमा बाजार में अधिक कंपनियों के प्रवेश को आसान बनाने पर केंद्रित हैं. इससे आर्थिक वृद्धि में तेजी आएगी और रोजगार सृजन में भी सहयोग होगा. इन बदलावों से बीमा उद्योग की कार्यकुशलता बढ़ाने, कारोबारी सुगमता में सुधार लाने और बीमा के प्रसार को बढ़ाने में मदद मिलेगी.