Rupee vs Dollar: भारतीय रुपये में कमजोरी लगातार बनी हुई है. पिछले हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन, शुक्रवार को, तीन वर्षों में सबसे बड़ी एक दिन की गिरावट देखी गई थी, जब रुपया 98 पैसों तक टूट गया था. हालांकि इसके बाद क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी और भारतीय रिज़र्व बैंक के हस्तक्षेप से रुपये को कुछ सहारा मिला.

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लेकिन यह मजबूती अधिक समय तक टिक नहीं सकी. गुरुवार को शुरुआती कारोबार में रुपये में फिर 2 पैसों की गिरावट दर्ज की गई और यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 89.24 के स्तर पर आ गया.

रुपये में गिरावट क्यों?

अस्थिर वैश्विक व्यापार माहौल और आयातकों द्वारा डॉलर की बढ़ती मांग के कारण रुपये पर दबाव बना. विदेशी मुद्रा कारोबारियों का कहना है कि घरेलू शेयर बाजारों में विदेशी पूंजी का नया प्रवाह और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी रुपये को कुछ सहारा दे रही है, लेकिन दबाव अब भी बना हुआ है.

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अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 89.19 प्रति डॉलर पर खुला, जिसके बाद शुरुआती कारोबार में यह फिसलकर 89.24 पर पहुंच गया. यह बुधवार के बंद भाव 89.22 की तुलना में 2 पैसों की कमजोरी दर्शाता है.

शेयर बाजार में तेजी

उधर, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 0.09 प्रतिशत गिरकर 99.43 पर आ गया. घरेलू शेयर बाजारों में भी तेजी देखने को मिली. बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 305.82 अंकों (0.36%) की बढ़त के साथ 85,915.33 पर पहुंच गया. एनएसई निफ्टी 50 भी 69.15 अंकों (0.26%) की बढ़त के साथ 26,274.45 पर ट्रेड करता दिखा.

अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड 0.43 प्रतिशत की गिरावट के साथ 62.86 डॉलर प्रति बैरल पर रहा. शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भी खरीदारी की स्थिति में थे. उन्होंने कुल 4,778.03 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे.

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