India's Trade Outlook: दक्षिण एशिया ही नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे तेज़ गति से आगे बढ़ने वाले देशों में भारत अव्वल बना हुआ है. जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ और रूस से तेल खरीदने के कारण अतिरिक्त 25 प्रतिशत, यानी कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया था, तब कई जानकारों ने भारत की अर्थव्यवस्था पर गहरे नकारात्मक प्रभाव की आशंका जताई थी. लेकिन इसके बिल्कुल विपरीत जो तथ्य सामने आए हैं, वे स्वयं राष्ट्रपति ट्रंप को भी हैरान कर सकते हैं.

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टैरिफ का नहीं पड़ा असर

भारतीय जीडीपी पर अमेरिकी टैरिफ का लगभग कोई असर नहीं पड़ा है. इसके विपरीत, भारत के निर्यात में और वृद्धि दर्ज की गई है. एसबीआई की रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत का निर्यात मजबूती से बढ़ा है.

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समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में अप्रैल से सितंबर के दौरान भारत का माल निर्यात बढ़कर 220 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया. पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 214 बिलियन डॉलर था, यानी इसमें लगभग 2.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

अमेरिका को निर्यात में बढ़ोतरी

अमेरिका द्वारा लगाए गए उच्च टैरिफ के बावजूद भारत से अमेरिका को किए गए निर्यात में लगभग 13 प्रतिशत, यानी 45 बिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई है. हालांकि, सालाना आधार पर देखें तो सितंबर 2025 में अमेरिका को भेजे गए शिपमेंट में पिछले वर्ष की तुलना में करीब 12 प्रतिशत की गिरावट आई है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका अब भी भारत का प्रमुख निर्यात बाजार है, लेकिन जुलाई 2025 के बाद अमेरिका को कुल निर्यात में बड़ी गिरावट दर्ज की गई. सितंबर 2025 में यह कमी लगभग 15 प्रतिशत तक पहुंच गई. इसके अलावा, अमेरिका को भेजे जाने वाले समुद्री उत्पादों और कीमती पत्थरों में भी उल्लेखनीय गिरावट आई है.

नए बाज़ारों की ओर रुख

दूसरी ओर, भारत ने अपने निर्यात का रुख बदलते हुए यूएई, चीन, वियतनाम, जापान, हांगकांग, बांग्लादेश, श्रीलंका और नाइजीरिया जैसे देशों की ओर मोड़ा है. गौरतलब है कि अमेरिकी हाई टैरिफ का सबसे अधिक असर भारत के कपड़ा, आभूषण और झींगा मछली जैसे उत्पादों पर पड़ा है. इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने निर्यातकों की सहायता हेतु 45,000 करोड़ रुपये की सहायता राशि को मंजूरी दी है, जिसमें 20,000 करोड़ रुपये की क्रेडिट गारंटी भी शामिल है.

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