एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई कर वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को बंदी बना लिया है, तो दूसरी ओर उन्होंने भारत पर और अधिक टैरिफ बढ़ाने की धमकी देकर नई कूटनीतिक हलचल पैदा कर दी है. ट्रंप के इस बयान के बाद भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है. हालांकि, इन सबके बीच जो आंकड़े सामने आए हैं, वे खुद अमेरिकी नेतृत्व को भी चौंका सकते हैं.

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अमेरिका से भारत का तेल आयात तेज़ी से बढ़ा

चालू वित्त वर्ष में नवंबर तक भारत ने अमेरिका से कच्चे तेल का आयात करीब 92 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है. इसके साथ ही भारत के कुल तेल आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 4.3 प्रतिशत से बढ़कर 7.6 प्रतिशत हो गई है. यह बढ़ोतरी ऐसे समय पर हुई है जब वॉशिंगटन लगातार भारत पर रूस से तेल खरीद कम करने का दबाव बनाता रहा है.

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रूस से तेल आयात में आई बड़ी गिरावट

इसके उलट रूस से भारत का तेल आयात अब पहले की तुलना में 37.9 प्रतिशत घटकर 33.7 प्रतिशत पर आ गया है. इस पर अमेरिकी सीनेटर लिंड्से ग्राहम ने भी टिप्पणी की है. उन्होंने कहा कि करीब एक महीने पहले वाशिंगटन में भारतीय राजदूत तरनजीत सिंह संधू (क्वात्रा) के आवास पर हुई बातचीत में उन्हें बताया गया था कि भारत ने रूस से तेल की खरीद में कटौती की है.

व्यापार समझौते पर अब भी सस्पेंस

इसके बावजूद भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता अभी तक अटका हुआ है. एनबीटी की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अधिकारी-स्तर की बैठकों में सभी मुद्दों पर चर्चा हो चुकी है और अब समाधान केवल राजनीतिक नेतृत्व के स्तर पर ही निकल सकता है.

क्यों बढ़ रहा है तनाव?

भारत ने अमेरिका के लिए अपने कृषि और डेयरी सेक्टर को खोलने से साफ इनकार कर दिया है. जानकारों का मानना है कि इसी वजह से राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से टैरिफ बढ़ाने की धमकी को दबाव की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि, तेल आयात के ताजा आंकड़े यह संकेत देते हैं कि ऊर्जा के मोर्चे पर भारत पहले ही अमेरिका की तरफ झुकाव दिखा चुका है, बावजूद इसके व्यापार वार्ता में गतिरोध बना हुआ है.

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