✕
  • होम
  • इंडिया
  • विश्व
  • उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड
  • बिहार
  • दिल्ली NCR
  • महाराष्ट्र
  • राजस्थान
  • मध्य प्रदेश
  • हरियाणा
  • पंजाब
  • झारखंड
  • गुजरात
  • छत्तीसगढ़
  • हिमाचल प्रदेश
  • जम्मू और कश्मीर
  • बॉलीवुड
  • ओटीटी
  • टेलीविजन
  • तमिल सिनेमा
  • भोजपुरी सिनेमा
  • मूवी रिव्यू
  • रीजनल सिनेमा
  • क्रिकेट
  • आईपीएल
  • कबड्डी
  • हॉकी
  • WWE
  • ओलिंपिक
  • धर्म
  • राशिफल
  • अंक ज्योतिष
  • वास्तु शास्त्र
  • ग्रह गोचर
  • एस्ट्रो स्पेशल
  • बिजनेस
  • हेल्थ
  • रिलेशनशिप
  • ट्रैवल
  • फ़ूड
  • पैरेंटिंग
  • फैशन
  • होम टिप्स
  • GK
  • टेक
  • ट्रेंडिंग
  • शिक्षा

फ्रॉड के जरिए कोई निकाल ले एटीएम, डेबिट कार्ड से पैसा, तो ऐसे आएगा वापस

ABP News Bureau   |  20 Oct 2016 07:19 PM (IST)
1

बैंकों को अपने कस्टमर्स को एसएमएस अलर्ट सेवा लेने के लिए बाध्य करना चाहिए और उन्हें बताना चाहिए कि इसके असली फायदे क्या हैं. जानें ग्राहक की क्या है जिम्मेदारी

2

अगर 4-7 दिनों के भीतर ग्राहक जानकारी देता है तो उसकी जिम्मेदारी 5000 रुपये तक सीमित होगी. गलत तरीके से लेन-देन की रकम यदि 5000 रुपये से ज्यादा है तो बचा पैसा बैंक को ग्राहक के खाते में जमा करानी होगी.

3

इस बीच, अगस्त में ही रिजर्व बैंक ने एक ड्राफ्ट सर्कुलर जारी किया जिसमें कहा गया ग्राहक जिम्मेदार नहीं होगा अगर धोखाधड़ी या गड़बड़ी बैंक की ओर से होती है तो: एसएमएस या ईमेल के जरिए अगर ग्राहक को अनाधिकृत लेन-देन का पता चलता है और वो तीन दिनों के भीतर-भीतर बैंक को जानकारी दे देता है तो वहां पर ग्राहक की जवाबदेही जीरो होगी. ऐसी स्थिति में बैंक को 10 दिनों के भीतर-भीतर पूरी-पूरी रकम ग्राहक के खाते में जमा करानी होगी.

4

फिलहाल, अभी आरबीआई का ये ड्राफ्ट सर्कुलर ही है, औपचारिक तौर पर नियम नहीं बना है.

5

1. कस्टमर्स की कोई लायबिलिटी नहीं होगीः अगर बैंक अपने इलेक्ट्रोनिक बैंकिंग ट्रांजेक्शन के जरिए ग्राहक के एटीएम-डेबिट कार्ड की सुरक्षा नहीं कर पाता है तो इस केस में ग्राहक की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी.

6

ग्राहक को इस सूरत में कुछ घाटा उठाना पड़ेगा अगर उसने किसी के साथ डेबिट का पासवर्ड शेयर किया है या किसी को कार्ड के सीवीवी, ग्रिड नंबर, वेलिडिटी की जानकारी दी है. इस सूरत में जब तक बैंक को जानकारी नहीं दी जाती तब तक का सारा नुकसान ग्राहक को खुद उठाना पड़ेगा. वहीं एक बार बैंक को फ्रॉड के बारे में जानकारी दे देने के बाद होने वाले घाटे की जिम्मेदारी बैंक को उठानी पड़ेगी.

7

3. अगर बैंक की तरफ से गलती हुई हो और असावधानी बैंक की रही हो जिसकी वजह से ग्राहक के खाते से पैसे निकल जाएं तो इस स्थिति में भी ग्राहक की कोई जिम्मेदारी नहीं होती और ग्राहक का पैसा लौटाने की जिम्मेदारी बैंक की होगी.

8

वैसे तो डेबिट कार्ड के दुरुपयोग या फिर उसकी क्लोनिंग कर कहीं और पैसा निकाले जाने की सूरत में कार्डधारक को तुरंत बैंक को जानकारी देने के साथ-साथ एफआईआर दर्ज करानी चाहिए. रिजर्व बैंक ने इस बारे मे जवाबदेही को लेकर स्थिति साफ कर रखी है. इसके साथ ही इंटरनेट से जरिए होने वाली धोखाधड़ी को लेकर ग्राहक की जवाबदेही को लेकर एक ड्राफ्ट सर्कुलर जारी किया है.

9

ग्राहक को पैसा देना पड़ेगा अगरः अगर ग्राहक फ्रॉड होने के 4-7 दिन के अंदर बैंक को सूचना नहीं देता है तो बैंक की जिम्मेदारी नहीं होगी और ग्राहक को अनअथॉराइज्ड पेमेंट की वैल्यू या 5000 रुपये (जो भी कम हो) का आर्थिक बोझ उठाना पड़ेगा.

10

रिजर्व बैंक ने बगैर कार्ड पेश किए यानी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से लेन-देन के लिए पहचान साबित करने के लिए अतिरिक्त जानकारी देना जरुरी कर रखा है. अब यदि ऐसा कोई लेन-देन बगैर अतिरिक्त जानकारी के होता है और ग्राहक बताए कि उसने ये लेन-देन नहीं किया तो बैंक को बगैर किसी आपत्ति के पूरे घाटे की भरपाई करनी होगी. यहां बस एक शर्त है कार्ड जारी करने वाला और ई कॉमर्स मर्चेंट दोनों ही भारत में स्थित होने चाहिए.

11

2. अगर थर्ड पार्टी ब्रीच होता है यानी ना तो ग्राहक की तरफ से और ना कस्टमर की तरफ से कोई गलती है बल्कि सिस्टम में कहीं और गलती है. इस हाल में ग्राहक अगर 3 दिन के अंदर बैंक को जानकारी दे देता है तो इस अवैध ट्रांजेक्शन से हुए नुकसान का जिम्मा बैंक का होगा ग्राहक का नहीं.

12

अगर ग्राहक फ्रॉड होने की जानकारी बैंक को 7 दिनों के भी बाद में देता है तो फिर उस बैंक के बोर्ड की पॉलिसी के मुताबिक ग्राहक की लायबिलिटी तय की जाएगी. इसके लिए लेकिन ये जरूरी है कि बैंक ग्राहक को पहले इस तरह के मामलों के लिए तय पॉलिसी की जानकारी ग्राहक को दे चुका हो.

13

डेबिट कार्ड की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी बैंक की है. सुरक्षा में चूक या फिर सुरक्षा व्यवस्था नाकाम होने से कोई घाटा होता है तो उसकी पूरी भरपाई करने की जिम्मेदारी बैंक की होगी.

14

डेबिट कार्ड पर किसी भी तरह के गलत लेन-देन होने की सूरत में ग्राहक को तुरंत बैंक की जानकारी देनी होगी. इसके बाद ही बैंक घाटे की भरपाई के लिए जिम्मेवार हो सकता है.

15

4. बैंक द्वारा ये कम्यूनिकेशन रिसीव करने के 4-7 दिनों के अंदर समस्या का समाधान हो जाता है तो ग्राहक को कोई पैसा नहीं खर्च करना होगा.

16

बैंकों को ग्राहक द्वारा गलत ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड कराने के 90 दिन यानी 3 महीने के भीतर समस्या का समाधान करना जरूरी है. वहीं क्रेडिट कार्ड के फ्रॉड होने की सूरत में ग्राहक के ऊपर बकाया दिनों का इंटरेस्ट नहीं लगाया जाएगा.

17

आपके डेबिट कार्ड की सुरक्षा के साथ छेड़छाड़ हो, फिर उसका दुरुपयोग कर कहीं पैसा निकाल लिया जाए तो आप क्या कर सकते हैं? डेबिट कार्ड से जुड़े रिजर्व बैंक के एक सर्कुलर में कहा गया है..

  • हिंदी न्यूज़
  • बिजनेस
  • फ्रॉड के जरिए कोई निकाल ले एटीएम, डेबिट कार्ड से पैसा, तो ऐसे आएगा वापस
About us | Advertisement| Privacy policy
© Copyright@2026.ABP Network Private Limited. All rights reserved.