IMF on India's Ecnomic Growth: आर्थिक विकास के मोर्चे पर भारत लगातार तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और अब दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा चुका है. वैश्विक अर्थव्यवस्था में चौथे स्थान पर पहुंचने के बाद भारत ने 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य तय किया है. इसी बीच अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी भारत की आर्थिक मजबूती को खुलकर स्वीकार कर रही हैं.

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अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत को वैश्विक विकास का एक अहम स्तंभ बताया है. जनवरी में जारी होने वाले वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक (WEO) से पहले IMF की प्रवक्ता जूली कोजाक ने भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर यह बड़ा बयान दिया है.

भारत की ग्रोथ से प्रभावित IMF

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IMF ने मजबूत घरेलू उपभोग के आधार पर वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था. प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जूली कोजाक ने कहा कि भारत की तीसरी तिमाही के नतीजे उम्मीद से कहीं बेहतर रहे हैं. ऐसे में जनवरी में आने वाले WEO अपडेट में भारत के ग्रोथ अनुमान को संशोधित किया जा सकता है. यह संकेत साफ करता है कि भारत की विकास दर को लेकर IMF का भरोसा और मजबूत हुआ है.

संयुक्त राष्ट्र (UN) ने भी भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर अपने पूर्वानुमान में बड़ा संशोधन किया है. वित्त वर्ष 2026 के लिए ग्रोथ अनुमान 4.4% से बढ़ाकर 6.6% और 2027 के लिए 6.7% की वृद्धि दर का अनुमान लगाया है. यूएन के अनुसार, निजी उपभोग में तेज़ी और सार्वजनिक निवेश में भारी बढ़ोतरी के चलते यह सुधार किया गया है. साथ ही, अमेरिकी हाई टैरिफ का भारतीय निर्यात पर असर सीमित रहने का भी आकलन किया गया है.

वर्ल्ड बैंक ने भी बढ़ाया GDP ग्रोथ अनुमान

विश्व बैंक ने मजबूत घरेलू मांग और कर सुधारों के दम पर चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की GDP वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7.2 प्रतिशत कर दिया है, जो उसके जून के अनुमान से 0.9 प्रतिशत अधिक है. विश्व बैंक की रिपोर्ट ‘वैश्विक आर्थिक संभावनाएं’ में कहा गया है कि: 2026-27 में ग्रोथ 6.5% तक धीमी हो सकती है.

यह अनुमान इस आधार पर है कि अमेरिका का 50% आयात शुल्क लागू रहेगा. इसके बावजूद रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज़ वृद्धि दर बनाए रखेगा.

घरेलू मांग बनी सबसे बड़ी ताकत

विश्व बैंक के मुताबिक, अमेरिका को होने वाले कुछ निर्यातों पर ऊंचे शुल्क के बावजूद भारत की वृद्धि दर पर बड़ा असर नहीं पड़ा है. इसकी वजह है- मजबूत घरेलू मांग, निर्यात में विविधता और निजी उपभोग में सुधार. भारत के कुल वस्तु निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 12 प्रतिशत है.

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि वित्त वर्ष 2027-28 में ग्रोथ 6.6% तक पहुंच सकती है. सेवा क्षेत्र की मजबूती, निर्यात में सुधार और निवेश में तेजी इसका आधार बनेगी. विश्व बैंक ने जून में भारत की वृद्धि दर 6.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था, जिसे अब बढ़ाया गया है.

IMF, संयुक्त राष्ट्र और विश्व बैंक- तीनों वैश्विक संस्थाओं के बढ़े हुए अनुमान इस बात का संकेत हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूती से आगे बढ़ रही है. मजबूत घरेलू मांग, कर सुधार और निवेश के दम पर भारत आने वाले वर्षों में भी दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में बना रह सकता है.

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