Dollar vs Rupee: वैश्विक अनिश्चितताओं और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बीच भारतीय रुपये में कमजोरी का सिलसिला जारी है. शुक्रवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में रुपये में गिरावट दर्ज की गई और यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 10 पैसे टूटकर 90.44 प्रति डॉलर पर पहुंच गया. डॉलर के मजबूत रुख और विदेशी पूंजी की निरंतर निकासी ने घरेलू मुद्रा पर दबाव बनाए रखा.
हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और घरेलू शेयर बाजार के सकारात्मक रुख ने रुपये को निचले स्तरों पर कुछ हद तक सहारा जरूर दिया.
कारोबार का हाल
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 90.37 प्रति डॉलर पर खुला था, लेकिन शुरुआती बढ़त को बरकरार नहीं रख सका और फिसलकर 90.44 पर आ गया. यह पिछले बंद भाव के मुकाबले 10 पैसे की गिरावट दर्शाता है. इससे पहले बुधवार को रुपया 90.34 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था.बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव के चलते गुरुवार को विदेशी मुद्रा बाजार बंद रहे थे.
क्यों टूट रहा है रुपया?
विदेशी मुद्रा बाजार के जानकारों के मुताबिक, रुपये पर दबाव के पीछे कई कारण हैं-
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की भारी बिकवाली
डॉलर की वैश्विक मजबूती
भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशकों का जोखिम से बचाव
छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती दिखाने वाला डॉलर इंडेक्स 0.02 प्रतिशत गिरकर 99.10 पर रहा, लेकिन इसका स्तर अब भी ऊंचा बना हुआ है.
शेयर बाजार और कच्चा तेल
घरेलू शेयर बाजार में मिला-जुला रुख देखने को मिला सेंसेक्स 210.04 अंक की बढ़त के साथ 83,592.75 पर बंद हुआ. निफ्टी 34.65 अंक फिसलकर 25,700.25 पर आ गया. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 0.34 प्रतिशत की गिरावट के साथ 63.54 डॉलर प्रति बैरल पर रहा, जिससे रुपये को कुछ राहत मिली. शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को एफआईआई ने शुद्ध रूप से 4,781.24 करोड़ रुपये के शेयर बेचे.
एक्सपर्ट की राय
मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी के मुताबिक, “केंद्रीय बैंक के संभावित हस्तक्षेप के चलते शुरुआती कारोबार में रुपये को कुछ मजबूती मिली, लेकिन मजबूत डॉलर, विदेशी निवेशकों की निकासी और घरेलू बाजारों में उतार-चढ़ाव के कारण यह तेजी टिक नहीं पाई और रुपया अंत में गिरावट के साथ बंद हुआ.”
उन्होंने आगे कहा कि वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते रुपये पर दबाव बना रह सकता है.” चौधरी के अनुसार, आने वाले सत्रों में डॉलर के मुकाबले रुपये की हाजिर कीमत 89.95 से 90.50 के दायरे में रहने की संभावना है.
कुल मिलाकर वैश्विक अस्थिरता, विदेशी पूंजी की निकासी और डॉलर की मजबूती के चलते फिलहाल रुपये की राह आसान नहीं दिख रही, हालांकि कच्चे तेल में नरमी और आरबीआई के संभावित हस्तक्षेप से गिरावट पर कुछ हद तक लगाम लग सकती है.