OPEC+ Decisions on Crude Oil: यूक्रेन युद्ध के बीच भारत को सस्ते कच्चे तेल की आपूर्ति करने वाले रूस से अब तेल खरीद पर ब्रेक लगने जा रहा है. अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते भारतीय कंपनियों ने रूस की दो प्रमुख तेल कंपनियों से कच्चा तेल खरीदना फिलहाल रोकने का निर्णय लिया है. इसी बीच, तेल उत्पादक देशों के समूह ओपेक प्लस (OPEC+) की हालिया बैठक में लिए गए निर्णयों ने भारत की चिंताओं को और बढ़ा दिया है.
ओपेक प्लस के दो बड़े फैसले
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ओपेक प्लस देशों ने रविवार को हुई बैठक में दो अहम निर्णय लिए— दिसंबर 2025 से रोजाना 1.37 लाख बैरल तेल उत्पादन बढ़ाया जाएगा.हालांकि यह बढ़ोतरी वैश्विक मांग की तुलना में बेहद मामूली है. साल 2026 की पहली तिमाही (जनवरी–मार्च) में उत्पादन वृद्धि पर पूरी तरह ब्रेक लगाया जाएगा. यानी इस अवधि में उत्पादन में कोई इजाफा नहीं होगा और बाजार की स्थिति पर नज़दीकी निगरानी रखी जाएगी.
भारत के लिए बढ़ सकती है मुश्किलें
ओपेक प्लस दुनिया के 22 प्रमुख तेल उत्पादक देशों का गठबंधन है, जो वैश्विक तेल उत्पादन और कीमतों पर बड़ा प्रभाव डालता है. अगर उत्पादन सीमित रहता है, तो कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ सकती हैं. भारत, जो अपनी तेल आवश्यकताओं का लगभग 85% आयात करता है, उसके लिए आयात बिल बढ़ना तय है. इससे राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) और महंगाई (Inflation) दोनों में उछाल आने की संभावना है. साथ ही, डॉलर की मांग बढ़ने से रुपये पर भी दबाव बढ़ सकता है.
अमेरिका ने हाल ही में रूस की दो प्रमुख तेल कंपनियों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं, जिससे भारत को सस्ते रूसी कच्चे तेल की खरीद पर रोक लगानी पड़ी है. अब भारतीय कंपनियां वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं- जैसे सऊदी अरब, इराक और यूएई- से कच्चा तेल मंगाने की तैयारी कर रही हैं, लेकिन वहां की कीमतें अपेक्षाकृत अधिक हैं.
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर ओपेक प्लस ने उत्पादन में बढ़ोतरी सीमित रखी और रूस से आयात घटा, तो आने वाले महीनों में भारत में पेट्रोल–डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी, मुद्रास्फीति में इजाफा और रुपये की कमजोरी देखने को मिल सकती है.