Home Loan EMI: रोटी, कपड़ा और मकान ये तीन चीजें लोगों की बेसिक जरूरते हैं. खुद के अपने घर का सपना हर किसी का होता है, जिसे पूरा करने के लिए लगभग सभी बैंक और कई हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां होम लोन देती हैं. होम लोन से मकान की जरूरत भी पूरी हो जाती है और आप आसान किस्तों में इसकी भरपाई भी कर देते हैं.

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हालांकि, कई बार समय पर ईएमआई चुकाने में काफी मुश्किलें भी आती है क्योंकि ईएमआई की रकम कोई छोटी रकम नहीं होती है. इसे हर महीने की किसी एक निर्धारित तारीख पर जमा करानी होती है. मान लीजिए कि कभी ऐसी स्थिति आए कि आपके अकाउंट में 20000 रुपये पड़े हो और होम लोन पर आपकी किस्त 25000 रुपये है, तो जाहिर तौर पर आपकी ईएमआई बाउंस होनी ही है. अब सवाल यह आता है कि अगर ईएमआई बाउंस हो जाए, तो क्या बैंक जुर्माना लगाता है और क्या इसका आपके सिबिल स्कोर पर असर पड़ता है. आइए जानते हैं:-

क्या बैंक लगाएगा जुर्माना?

होम लोन पर अगर आपकी ईएमआई बाउंस हो जाएं, तो आपको बैंक को जुर्माना देना होगा. बैंक में बैलेंस पर्याप्त नहीं होगा, तो ऑटो डेबिट फेल हो जाएगा. इस पर बैंक 250-500 रुपये के बीच बाउंस चार्ज काटेगा. इसके अलावा, लोन पेनल्टी भी लगाई जाएगी.

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इसके तहत, आपने जिस भी बैंक या संस्था से लोन लिया है, वह 500-1000 रुपये तक का अतिरिक्त जुर्माना या बकाया ईएमआई पर 1-2 परसेंट प्रति माह की दर से दंडात्मक ब्याज (Penal Interest) वसूलेगी. 

अगर आपकी पहली ईएमआई बाउंस हुई है औ आपने ऐसा जानबूझकर नहीं किया है, तो आपको बिना कुछ सोचे अपने बैंक ब्रांच में जाना होगा. वहां मैनेजर से मिलकर अपनी बात उनके साथ रखें और भविष्य में ऐसा न होने का भरोसा दें. उन्हें आपकी बताई गई बात वाजिब लगे, तो हो सकता है कि बैंक की ओर से लगाई गई पेनल्टी में कुछ कमी आ सकती है.

अगर एक बाद दूसरी किस्त भी आपकी बाउंस हो गई है, तो पहले तो अपनी किस्त भरें और फिर बैंक मैनेजर से रिक्वेस्ट कर सिविल में नेगेटिव रिपोर्ट न भेजने का रिक्वेस्ट करें. लगातार तीन महीने तक किस्त बाउंस होने पर आपका सिबिल स्कोर गड़बड़ा सकता है. अगर सिबिल स्कोर खराब हो गया, तो दोबारा लोन मिलने में परेशानी आ सकती है.

सिबिल स्कोर पर असर

EMI बाउंस होने पर इसकी सूचना तुरंत क्रेडिट ब्यूरो को दी जाती है. इससे आपका सिबिल स्कोर कम हो जाएगा, जिससे भविष्य में नया लोन मिलने में चुनौती आ सकती है. और तो और सिबिल गड़बड़ाने से आपको क्रेडिट कार्ड मिलने में भी दिक्कतें आ सकती हैं. 

अगर लंबे समय तक हीं चूका पाएं EMI तो? 

अगर आप पैसों का इंतजाम लंबे समय तक नहीं कर पा रहे हैं, तो अपने बैंक से बात कर कुछ समय का Grace Period मांग सकते हैं. आप बैंक को अपनी मजबूरी बताकर कुछ समय के लिए किस्त को होल्ड पर रखने का आवेदन भी कर सकते हैं.

अगर सैलरी लेट आने की वजह से आपको हर बार किस्त भरने में दिक्कतें आ रही हैं, तो आप एरियर EMI के लिए अपने बैंक मैनेजर से बात कर सकते हैं, जिसमें ईएमआई की रकम महीने के आखिर में भरनी होती है. जबकि आमतौर पर लोगों को एडवांस ईएमआई का विकल्प दिया जाता है. इसमें महीने की शुरुआत में किस्त की रकम भरनी होती है.  

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