दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों के बीच इन दिनों एक खास तरह के ऑफर की चर्चा है. इसमें कंपनी खुद कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने का विकल्प दे रही है और बदले में उन्हें अच्छी-खासी रकम भी मिल सकती है. Google ने भी अपने कुछ कर्मचारियों के लिए ऐसा ही Voluntary Exit Programme शुरू किया है. इस ऑफर के तहत कर्मचारी अपनी मर्जी से नौकरी छोड़ सकते हैं और कंपनी से तय नियमों के मुताबिक पैसा ले सकते हैं.

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खास बात ये है कि ये ऑफर Google के सभी कर्मचारियों के लिए नहीं है. कंपनी ने इसे कुछ चुनिंदा देशों और टीमों तक ही सीमित रखा है. ऐसे में सवाल है कि आखिर Google का ये Exit पैकेज क्या है, इसमें कितने महीने की सैलरी मिलेगी और कौन-कौन कर्मचारी इसके लिए योग्य हैं?

क्या है Google का Voluntary Exit Programme?Google के इस प्रोग्राम को Voluntary Buyout या Voluntary Exit Programme कहा जा रहा है. इसमें कंपनी अपने कुछ कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने के बदले आर्थिक मदद देने का ऑप्शन देती है. कर्मचारी चाहें तो इस ऑफर को स्वीकार करके कंपनी से बाहर जा सकते हैं. ये नॉर्मल छंटनी से काफी अलग है, क्योंकि इसमें कर्मचारी को अपनी मर्जी से फैसला लेने का मौका मिलता है.

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Google ने इस तरह के प्रोग्राम की शुरुआत कुछ टीमों में 2025 में की थी. इसके बाद जून 2026 में इसे कुछ और देशों तक बढ़ाया गया. 

कितने महीने की सैलरी मिलेगी?Exit पैकेज में मिलने वाली रकम कर्मचारी के काम के अनुभव और कंपनी में बिताए गए समय पर निर्भर करती है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, स्विट्जरलैंड में इस ऑफर को स्वीकार करने वाले कर्मचारियों को कंपनी में काम किए गए हर साल के बदले एक महीने की सैलरी दी गई. हालांकि, इसकी अधिकतम सीमा 12 महीने की सैलरी रखी गई थी.

जैसे, अगर किसी कर्मचारी ने Google में 5 साल काम किया है तो उसे इस फॉर्मूले के हिसाब से 5 महीने की सैलरी मिल सकती है. वहीं, 15 साल काम करने वाले कर्मचारी के लिए भी अधिकतम भुगतान 12 महीने की सैलरी तक सीमित रहेगा.

कौन-कौन हैं Eligible?Google ने जून 2026 में कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान और स्विट्जरलैंड के कुछ कर्मचारियों के लिए यह ऑफर बढ़ाया था. इससे पहले अमेरिका और ब्रिटेन की कुछ टीमों में भी Voluntary Exit Programme दिया गया था.

हालांकि, कंपनी के सभी विभाग इसमें शामिल नहीं हैं. Google Cloud और AI रिसर्च यूनिट DeepMind के कर्मचारियों को पहले के कुछ Buyout ऑफर से बाहर रखा गया था. स्विट्जरलैंड में भी DeepMind को इस प्रोग्राम में शामिल नहीं किया गया है. 

क्या भारत में भी मिला है ऑफर?फिलहाल Google के इस नए विस्तार में भारत का नाम शामिल नहीं है. जून में जिन पांच देशों में ऑफर बढ़ाया गया था, उनमें भारत नहीं था. 

क्यों लिया गया फैसला?Google की पैरेंट कंपनी Alphabet इन दिनों AI और क्लाउड कंप्यूटिंग पर बड़ा निवेश कर रही है. कंपनी अपने संसाधनों को उन क्षेत्रों में बढ़ाना चाहती है, जिन्हें वो खास मानती है. ऐसे में Voluntary Exit Programme के जरिए वो कुछ टीमों में कर्मचारियों की संख्या और काम के ढांचे को बदलने की कोशिश कर रही है. इस बीच Microsoft ने भी करीब 60 हजार कर्मचारियों के लिए Voluntary Exit Offer की घोषणा की है. 

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