UPI से पेमेंट करना अब तक लोगों के लिए आसान और फ्री रहा है. लेकिन UPI चार्ज को लेकर चल रही चर्चा का असर अभी से छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों पर दिखने लगा है. हैरानी की बात ये है कि UPI पर प्रस्तावित चार्ज अभी लागू भी नहीं हुआ है, लेकिन कुछ वेंडरों से डिजिटल पेमेंट करने पर ही एक्स्ट्रा पैसे मांगे जा रहे हैं. भारतीय स्कूल ऑफ बिजनेस के एक सर्वे में ये बात सामने आई है.

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सर्वे के मुताबिक, करीब हर 10 में से एक वेंडर ने बताया कि उसके सप्लायर ने UPI से पेमेंट करने पर उससे एक्स्ट्रा चार्ज मांगा है. यानी जिन दुकानदारों को अभी सीधे तौर पर UPI चार्ज नहीं देना है, वे भी सप्लायर की तरफ से मांगे जा रहे एक्स्ट्रा पैसे का सामना कर रहे हैं.

कितने वेंडरों पर हुआ सर्वे?ISB के सेंटर फॉर एनालिटिकल फाइनेंस ने ये सर्वे 24 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 के बीच किया था. इसमें 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 64 शहरों और कस्बों के 722 वेंडरों को शामिल किया गया. सर्वे में 10.4 फीसदी वेंडरों ने बताया कि पिछले 10 दिनों में उनके सप्लायर ने UPI से पेमेंट करने पर एक्स्ट्रा पैसे मांगे थे.

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रिपोर्ट के मुताबिक, कई सप्लायर वेंडरों को साफ कह रहे हैं कि अगर वे UPI से पेमेंट करेंगे तो उन्हें एक्स्ट्रा चार्ज देना होगा, जबकि कैश में भुगतान करने पर ऐसा कोई पैसा नहीं मांगा जाएगा. इससे छोटे दुकानदारों की लागत बढ़ सकती है.

UPI पर कितना चार्ज लगेगा?दरअसल, UPI पेमेंट पर MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगाने का प्रस्ताव है. इसके तहत चुनिंदा बड़े मर्चेंट को 2,000 रुपये से ज्यादा के कुछ UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 फीसदी चार्ज देना होगा. इस चार्ज की अधिकतम सीमा 300 रुपये रखी गई है. वहीं, रेलवे, फ्यूल और शिक्षा जैसी कुछ कैटेगरी में 2,000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर 5 रुपये का फ्लैट चार्ज प्रस्तावित है.

यह व्यवस्था पहले 15 अक्टूबर से लागू होनी थी, लेकिन नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने इसे दिवाली के बाद तक टाल दिया है. फिलहाल इसे लागू करने की नई तारीख घोषित नहीं की गई है.

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