UPI Payment: भारत में यूपीआई का क्रेज जबरदस्त है और उसका कारण है इसमें लेनदेन पर कोई चार्ज नहीं (Zero MDR) देना पड़ता है. हालांकि, इसी के चलते Google Pay, Phonepe जैसी फिनटेक कंपनियों को भारी खर्च उठाना पड़ता है इसलिए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने की मांग लगातार उठती रही है.  

Continues below advertisement

सूत्रों के मुताबिक, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) का 2017 का एक नियम, जो दुकानदारों को डेबिट कार्ड की फीस ग्राहकों पर डालने से रोकता है, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) यूजर्स को मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) फीस से बचाने के लिए एक मॉडल बन सकता है. आरबीआई ने डेबिट कार्ड के लिए जो नियम बनाए हैं, अगर उन्हें यूपीआई पर थोड़े-बहुत बदलाव के साथ लागू किया जाए, तो यह आम जनता को नाराज किए बिना एक संतुलित शुल्क मॉडल का सटीक ब्लूप्रिंट साबित हो सकता है.

क्या है आरबीआई के नियम? 

भारतीय रिजर्व बैंक के नियम के मुताबिक, 20 लाख से कम सालाना टर्नओवर वाले छोटे मर्चेंट्स के लिए डेबिट कार्ड पर MDR की ऊपरी सीमा बहुत कम (अधिकतम 0.40%) तय की गई है. आरबीआई का यह नियम 20 लाख से कम कमाई वाले मर्चेंट्स को MDR से बचाता है. यूपीआई पर इसके इस्तेमाल के तहत, छोटे किराना स्टोर्स या रेहड़ी-पटरी वालों को MDR शुल्क से 100% मुक्त रखा जा सकता है.

Continues below advertisement

वहीं डेबिट कार्ड के नियम अनुसार, बड़े-बड़े शोरूम, मॉल्स, ई-कॉमर्स कंपनियों से बैंक ज्यादा MDR वसूलता है. इस नियम को लागू करते हुए केवल बड़े संगठित रिटेलर्स और मर्चेंट ट्रांजैक्शंस पर ही मामूली MDR लगाया जाए क्योंकि ये इस लागत को सहने के काबिल हैं. 

आम जनता को मिलेगी राहत

इस नियम के लागू होने से आम उपभोक्ताओं के लिए एक बैंक अकाउंट से दूसरे में पैसे भेजना हमेशा की तरह 100% फ्री रहेगा. NPCI और फिनटेक कंपनियों के लिए भी रेवेन्यू जेनरेट होगा, जिसका इस्तेमाल वे अपने सर्वर और सुरक्षा ढांचे को मजबूत बनाने के लिए कर सकेंगे. वर्तमान में सरकार को कंपनियों के घाटे की भरपाई के लिए करोड़ों रुपये का इंसेन्टिव फंड देना पड़ता है. 

ये भी पढ़ें:

क्या बढ़ाई जाएगी LPG e-KYC की डेडलाइन? आज खत्म हो रही मियाद, 5 मिनट में ऐसे करें वेरिफेशन