Coca-Cola Layoffs: कोका-कोला इंडिया (Coca-Cola India) की बॉटलिंग कंपनी, हिंदुस्तान कोका-कोला बेवरेजेज (HCCB) अपने करीब 300 लोगों की छंटनी करने वाली है. यह फैसला कामकाज को पहले से बेहतर और ज्यादा मुनाफे वाला बनाने के लिए लिया गया है. HCCB में करीब 5,000 लोग काम करते हैं और देश भर में इसकी 15 मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटीज है, जहां यह कोका-कोला, थम्स अप और स्प्राइट जैसे एरेटेड ड्रिंक्स, मिनट मेड जूस और किनले मिनरल वॉटर जैसे ब्रांड्स की बॉटलिंग और डिस्ट्रीब्यूशन की जाती है.
कंपनी से जुड़े एक अधिकारी ने इकोनॉमिक टाइम्स से बात करते हुए कहा, बिजनेस से रिलेटेड जरूरतों के बदलने के बाद इससे तालमेल बिठाने के लिए हमें अपनी कैपेसिटी और स्ट्रक्चर का वैल्यूएशन फिर से करना होगा. और जहां तक जरूरी हो इसमें सुधार के लिए कदम उठाए जाने हैं. उन्होंने बताया कि इस छंटनी का कंपनी के ऑपरेशंस पर कोई असर नहीं पड़ेगा. उन्होंने यह भी कहा कि हम लगातार आगे बने रहने के लिए समय-समय पर बिजनेस ऑपरेशंस का आकलन करते हैं.
इन डिपार्टमेंट्स से निकाले जाएंगे लोग
कोका-कोला भारत की सबसे बड़ी बेवरेज कंपनी है, जो सॉफ्ट ड्रिंक्स सेगमेंट में लीडरशिप पोजीशन पर है. नाम न जाहिर करने की शर्त पर कंपनी से जुड़े एक शख्स ने बताया कि सेल्स, सप्लाई चेन, डिस्ट्रीब्यूशन और प्लांट्स में बॉटलिंग ऑपरेशंस जैसे फंक्शन्स में लगभग 4-6 परसेंट कर्मचारियों की छंटनी की जा रही है.
इस साल कितना हुआ मुनाफा?
बिजनेस इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म टॉफ्लर से मिली रेगुलेटरी फाइलिंग के अनुसार, कारोबारी साल 2025 में HCCB का नेट प्रॉफिट 73 परसेंट गिरकर 756.64 करोड़ रुपये हो गया, जबकि ऑपरेशंस से रेवेन्यू 9 परसेंट की गिरावट के साथ 12,751.29 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. कंपनी ने इस गिरावट का कारण 2024 में पिछले साल के मुकाबले ज्यादा बेस को बताया, जब उसने कई इलाकों में बॉटलिंग ऑपरेशंस मौजूदा फ्रेंचाइजी पार्टनर्स को बेच दिए थे.
HCCB ने राजस्थान, बिहार, नॉर्थ-ईस्ट और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में बॉटलिंग ऑपरेशंस अपने तीन सबसे बड़े ब कोका-कोला इन बॉटलिंग पार्टनर्स को कॉन्सेंट्रेट सप्लाई करती है, जो अब फिर से बेवरेजेस बनाने और डिस्ट्रीब्यूशन का काम करते हैं. इस साल मार्च से सितंबर तक गर्मियों के पीक महीनों में बेमौसम और भारी बारिश के कारण साल भर डिमांड भी कम रही. अप्रैल-जून की अवधि भारत के लगभग 60,000 करोड़ रुपये के सॉफ्ट ड्रिंक्स मार्केट के लिए सालाना सबसे बड़ा तिमाही होता है.
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