Central Bank of India: अगले साल जनवरी में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (Central Bank of India) प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन यानी PCA फ्रेमवर्क से बाहर लाया जा सकता है. जानकारी के मुताबिक 31 दिसंबर के बाद अगर सेंट्रल बैंक के हक में फैसला आया तो ये बैंक खुलकर बिजनेस कर पाएगा. रिजर्व बैंक दिसंबर तिमाही में आने वाले बैंक के नतीजों के बाद उसकी वित्तीय स्थिति का मूल्यांकन करेगा तब फैसला देगा.


खबरों में यह भी कहा जा रहा है कि आरबीआई की तरफ से  पब्लिक सेक्टर बैंकों में पूंजी की जरूरत की भी समीक्षा की जाएगी. फिलहाल किसी बैंक की तरफ से नई पूंजी की मांग नहीं की है. PCA फ्रेमवर्क से बाहर निकाले जाने के बाद बैंक खुलकर लोन बांट सकेगा और कारोबार बढ़ा सकेगा. अगर कोई बैंक रिजर्व बैंक के PCA के दायरे के अंतर्गत रहता है तो उसपर लोन बांटने और कारोबार करने संबंधी कई तरह की पाबंदियां होती हैं.


ये बैंक PCA से बाहर निकले


सितंबर के महीने में ही RBI ने इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) को PCA फ्रेमवर्क से बाहर निकाला था. उसी महीने में यूको बैंक को भी इस फ्रेमवर्क से बाहर निकाला था. PCA में रहने के दौरान बैंक अपनी शाखा का विस्तार तक नहीं कर सकते हैं.


क्यों रखा जाता है PCA में


जब RBI को लगता है कि किसी बैंक के पास जोखिम का सामना करने को पर्याप्त पूंजी नहीं है. साथ ही उधार दिए धन से आय नहीं हो रही और मुनाफा नहीं हो रहा है तो उस बैंक को ‘पीसीए’ में डाल दिया जाता है. ताकि उसकी वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए तत्काल कदम उठाए जा सकें.


कोई बैंक कब इस स्थिति से गुजर रहा है, यह जानने को आरबीआई ने कुछ पैमाने तय किए हैं, जिनमें उतार-चढ़ाव से इसका पता चलता है. जैसे सीआरएआर, नेट एनपीए और रिटर्न ऑन एसेट्स. इन फैक्टर्स को ध्यान में रखकर आरबीआई यह फैसला लेता है.


ये भी पढ़ें


Sensex Fall: कोरोना के नए वेरिएंट से सहमे बाजार, निवेशकों के लाखों करोड़ स्वाहा


LIC Jeevan Labh: क्या आपने सुना है इस शानदार स्कीम के बारे में, रोज 10 रुपये से भी कम के निवेश पर मिलेंगे 17 लाख