Budget 2026: जैसे-जैसे 1 फरवरी का दिन नजदीक आ रहा है, बजट को लेकर हलचल तेज हो रही है. इस दिन आम लोगों से लेकर बाजार तक, हर किसी की नजरें वित्त मंत्री के बजट भाषण पर टिकी होती हैं. लेकिन बजट पेश होने से पहले एक खास प्रक्रिया होती है, जो आमतौर पर चर्चा में नहीं रहती. इस प्रक्रिया की शुरुआत होती है हलवा सेरेमनी से.
हलवा सेरेमनी के बाद बजट से जुड़े कई अहम अधिकारी एक तय अवधि के लिए लॉक कर दिए जाते हैं. इसे ही ‘लॉक-इन पीरियड’ कहा जाता है. इस दौरान अधिकारी न तो किसी से संपर्क कर सकते हैं और न ही बजट से जुड़ी कोई जानकारी बाहर जा सकती है. आइए जानते हैं आखिर यह लॉक-इन पीरियड क्या होता है और इसकी शुरुआत कब हुई थी?
क्या होता है लॉक-इन पीरियड?
हलवा सेरेमनी के बाद बजट पेश होने तक का जो समय होता है, उसे ही लॉक-इन पीरियड कहा जाता है. इस दौरान बजट की तैयारी से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी एक सुरक्षित परिसर में रखे जाते हैं. वे बाहर नहीं जा सकते और न ही किसी बाहरी व्यक्ति से मुलाकात या बातचीत कर सकते हैं.
इस अवधि में अधिकारी अपने परिवार समेत अन्य लोगों से नहीं मिल सकते हैं. मोबाइल फोन, इंटरनेट और सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर भी रोक रहती है. ताकि बजट से जुड़ी कोई जानकारी समय से पहले बाहर न जा सके.
कहां से शुरू हुई लॉक-इन पीरियड की परंपरा?
बजट से पहले लागू किया जाने वाला लॉक-इन पीरियड कोई नई बात नहीं है. इसकी शुरुआत ब्रिटिश शासन के दौर से हुई थी. आजादी के बाद भी सरकार ने इस परंपरा को बरकरार रखा, ताकि बजट से जुड़ी गोपनीय जानकारी सुरक्षित रह सके. साल 1950 में बजट से संबंधित जानकारियां लीक हो गई थी. जिसके बाद से इस प्रक्रिया को और सख्त किया गया है.
शुरुआती समय में बजट से जुड़े दस्तावेजों की छपाई राष्ट्रपति भवन स्थित प्रेस में होती थी, लेकिन लीक की घटनाओं के बाद व्यवस्था बदली गई. इसके बाद मिंटो रोड प्रेस में प्रिंटिंग शुरू हुई और फिर 1980 के बाद से हर साल बजट डॉक्यूमेंट्स नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में मौजूद विशेष प्रेस में छापे जाने लगे.
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