वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज रविवार (1 फरवरी) को लगातार नौवां बजट पेश करेंगी. ये बजट अप्रैल 2026 से मार्च 2027 तक के वित्त वर्ष के लिए होगा. इस बजट से सभी को उम्मीद है कि सरकार अर्थव्यवस्था की रफ्तार को बरकरार रखने के लिए ठोस कदम उठाएगी. 

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पिछले कुछ सालों में सरकार ने इनकम टैक्स और GST में बड़ी कटौती की है. इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाया गया है और RBI ने ब्याज दरें घटाईं हैं. इन सबके कारण ही भारतीय अर्थव्यवस्था डोनाल्ड ट्रंप के 50 फीसदी टैरिफ का सामना कर रही है. घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है और महंगाई हाल के ऊंचे स्तर से नीचे आई है. 

टैक्स कटौती के चलते सरकार की कमाई घटी है इसलिए नए उपायों की गुंजाइश सीमित हो गई है. सबसे बड़ी चुनौती अब अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए कोई ठोस कदम उठाना है. अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अमेरिका के साथ ट्रेड टॉक को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण बाजार डगमगाए हैं. ऐसे में निर्मला सीतारमण के लिए निवेशकों का भरोसा जल्द बहाल करना जरूरी है. पैसे की कमी के बावजूद सरकार के खर्च घटाने की संभावना नहीं है. पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और असम में चुनाव के कारण कुछ नए ऐलान किए जा सकते हैं.

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कैपिटल खर्च पर फोकसपिछले कुछ सालों में सरकार ने सड़कों, रेलवे, रक्षा निर्माण, शहरी बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक्स पर खर्च तेजी से बढ़ाया है ताकि निजी निवेश को आकर्षित कर सके. वित्त वर्ष 2027 के लिए अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि कैपेक्स में अच्छी बढ़ोतरी होगी. रेलवे, बिजली ट्रांसमिशन, रक्षा और शहरी परिवहन को प्राथमिकता मिलेगी. राज्यों के बुनियादी ढांचे के लिए ब्याज-मुक्त लोन का समर्थन जारी रहेगा.

DBS बैंक की वरिष्ठ अर्थशास्त्री राधिका राव का कहना है कि GST दरों में बदलाव, प्रत्यक्ष करों में राहत और आर्थिक बढ़त कमजोर रहने की वजह से टैक्स वसूली तय लक्ष्य से पीछे रह गई है. उन्हें उम्मीद है कि बजट में ऐसे कदम उठाए जाएंगे जो सरकार की लंबी अवधि की आर्थिक रणनीति से जुड़े हों, जैसे मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना और सामाजिक कल्याण पर जोर देना.

नौकरियों पर जोरमोदी सरकार लगातार स्थिर और साफ टैक्स सिस्टम पर जोर देती रही है, खासकर इनकम टैक्स में. व्यक्तिगत टैक्स में अगर कोई बदलाव हुआ भी तो वह मामूली हो सकता है, ताकि मध्यम वर्ग पर बोझ थोड़ा कम हो और खर्च बढ़े. सरकार का फोकस टैक्स पालन बेहतर करने और डिजिटाइजेशन व डेटा के जरिए टैक्स दायरा बढ़ाने पर रहेगा.

इस बार नौकरियां पैदा करने पर सरकार का खास ध्यान होगा. श्रम-गहन निर्माण, कौशल विकास और अप्रेंटिसशिप से जुड़े प्रोत्साहन दिए जा सकते हैं. MSME के लिए ज्यादा आवंटन या क्रेडिट गारंटी सपोर्ट मिल सकता है. उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं में सुधार हो सकता है, क्योंकि सरकार उनकी निर्माण क्षमता, निर्यात और रोजगार पर प्रभाव का मूल्यांकन कर रही है.

ग्रीन एनर्जी (हरित ऊर्जा) भारत अपने एनर्जी टारगेट को आगे बढ़ा रहा है, इसलिए बजट में रिन्यूएबल एनर्जी, बैटरी स्टोरेज और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को मजबूत समर्थन मिलेगा. क्लीन एनर्जी उपकरणों के घरेलू निर्माण को बढ़ावा और आयात निर्भरता कम करने के लिए कदम उठाए जा सकते हैं. साथ ही तेल और गैस बुनियादी ढांचे और रणनीतिक भंडारों के लिए आवंटन बरकरार रखा जाएगा ताकि वैश्विक अस्थिरता में एनर्जी की सुरक्षा सुनिश्चित हो.

एक्सपर्ट के मुताबिक, कुल मिलाकर, वित्त वर्ष 2027 का बजट पुराने रास्ते पर ही आगे बढ़ने का संकेत देगा, लंबी अवधि की विकास योजनाओं को मजबूत करेगा और तात्कालिक आर्थिक चुनौतियों से निपटने की कोशिश करेगा। बाजारों की नजर इस बात पर होगी कि भारत तेज विकास की रफ्तार को आर्थिक स्थिरता बनाए रखते हुए कायम रख पाता है या नहीं।

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