Budget 2020: कविता और शेर-ओ- शायरी से बजट का पुराना नाता है. आज जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश किया तो उन्होंने कश्मीरी कविता का जिक्र किया. बजट पेश होने के बाद कुछ शेर और जुमले हैं जो अक्सर सुनाई देते हैं. आम बजट संसद में पेश हो चुका है. अब बजट को लेकर लोगों की प्रतिक्रियां आने लगी हैं. शेर और शायरी के माध्यम से भी बजट को लेकर लोग अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं, सोशल मीडिया पर इनकी चर्चा है. कुछ शेर ऐसे हैं जो हर बार बजट के आने के बाद सबसे अधिक सुनाई देते हैं. जानते हैं इनके बारे में-
साहित्य प्रेमी और ऊर्दू अदब के शौकीन अदम गोंडवी के नाम से अच्छी तरह से परिचित हैं. वैसे तो उन्होंने कई शेर लिखे, लेकिन उनका एक शेर जो बहुत लोकप्रिय है, जो अक्सर बजट के बाद सबसे अधिक सुनाई देता है. वो शेर है-
''तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है मगर ये आंकड़े झूठे हैं ये दावे किताबी हैं.''
अदम गोंडवी के साथ साथ एक शायर और भी हैं जिनके शेर खूब पढ़े जाते हैं. दुष्यंत कुमार के शेर बहुत ही लोकप्रिय हैं. बजट के बाद इनके भी कुछ शेर हैं जो सुनाई देते हैं-
''यहां तक आते- आते सूख जाती हैं कई नदियां मुझे मालूम है पानी कहां ठहरा हुआ होगा.''
इनका एक और शेर है-
''कहां तो तय था चरागां हर एक घर के लिए कहां चराग मयस्सर नहीं शहर के लिए.''
इसके अलावा कुछ जुमले भी हैं जैसे-
'मुंगेरी लाल के हसीन सपने' दरअसल ये दूरदर्शन का एक सीरियल था जो 1989 में प्रसारित होता था. इस सीरियल को मशहूर निर्माता निर्देशक प्रकाश झा ने निर्देशित किया था. ये एक कॉमेडी सीरियल था, जिसमें रघुवीर यादव ने मुख्य किरदार निभाया था. इस जुमले को बजट के लिए खूब इस्तेमाल किया जाता है. दूर के ढ़ोल- इस जुमले का भी बजट में खूब प्रयोग किया जाता है.