किसी क्षेत्र में दृष्टि और उद्देश्य होना एक बात है, लेकिन उन विचारों को वास्तविकता में बदलते हुए स्थापित मानकों को चुनौती देना और आने वाली पीढ़ियों के लिए नए प्रतिमान गढ़ना बिल्कुल अलग बात है. डॉ. प्रमोद कुमार उन चुनिंदा वैज्ञानिकों में शामिल हैं जिन्होंने केवल भविष्य की कल्पना नहीं की, बल्कि उसे आकार देने का साहस भी दिखाया है. एक ‘क्वांटम सीकर’, प्रिंसिपल साइंटिस्ट और अबू धाबी स्थित Quantum Research & Development Centre (QRDC) के डायरेक्टर ऑफ रिसर्च के रूप में डॉ. कुमार ऐसे समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की दिशा पर काम कर रहे हैं, जब पूरी दुनिया AI की बढ़ती क्षमताओं और उससे जुड़ी चुनौतियों के बीच संतुलन तलाश रही है. पिछले कुछ वर्षों में AI विकास की परिभाषा लगभग एक जैसी रही है—बड़े मॉडल, विशाल डेटा सेट और अधिक शक्तिशाली GPU. लंबे समय तक तकनीकी जगत का विश्वास था कि बेहतर AI के लिए केवल अधिक कंप्यूटिंग शक्ति की आवश्यकता है. लेकिन अब यह मॉडल अपनी सीमाएं दिखाने लगा है. आज दुनिया की सबसे उन्नत AI प्रणालियों को संचालित करने के लिए विशाल ऊर्जा अवसंरचना, जटिल कूलिंग सिस्टम और अरबों डॉलर के हार्डवेयर निवेश की आवश्यकता पड़ रही है. ऐसे में तकनीकी जगत के सामने एक महत्वपूर्ण प्रश्न खड़ा हो गया है—क्या AI इसी गति और ढांचे के साथ आगे बढ़ता रह सकता है?डॉ. प्रमोद कुमार का मानना है कि इसका उत्तर केवल अधिक शक्ति में नहीं, बल्कि कंप्यूटिंग की मूलभूत संरचना को पुनर्परिभाषित करने में छिपा है. इसी सोच के साथ वे QRDC में क्षेत्र के सबसे महत्वाकांक्षी फोटोनिक इंटेलिजेंस कार्यक्रमों में से एक का नेतृत्व कर रहे हैं. इस पहल का उद्देश्य मशीनों द्वारा सूचना संसाधित करने के तरीके को पूरी तरह बदल देना है. QRDC का दृष्टिकोण पारंपरिक AI अवसंरचना से अलग है. जहां मौजूदा प्रणालियां इलेक्ट्रॉनिक GPU पर निर्भर हैं, वहीं संस्थान द्वारा विकसित आर्किटेक्चर में प्रकाश स्वयं गणना का माध्यम बन जाता है. यह केवल गति बढ़ाने का प्रयास नहीं है, बल्कि कंप्यूटिंग की कार्यप्रणाली को नए सिरे से परिभाषित करने का प्रयास है. फोटॉन बिना प्रतिरोध के यात्रा कर सकते हैं, जिसके कारण डेटा का प्रवाह इलेक्ट्रॉनों की तुलना में कहीं अधिक तेज़ और ऊर्जा-कुशल हो जाता है. AI प्रणालियों में मैट्रिक्स मल्टीप्लिकेशन सबसे अधिक संसाधन लेने वाली प्रक्रिया मानी जाती है. ऐसे में फोटोनिक कंप्यूटिंग न केवल प्रदर्शन बढ़ा सकती है, बल्कि बुद्धिमान प्रणालियों की आर्थिक व्यवहार्यता को भी नए स्तर पर ले जा सकती है. QRDC द्वारा विकसित एकीकृत फोटोनिक चिप्स को लचीली MZI Mesh Architectures पर आधारित किया गया है, जिनमें Clements, Diamond और Reck कॉन्फ़िगरेशन शामिल हैं. यह इंजीनियरिंग दृष्टिकोण निर्माण प्रक्रिया की व्यवहारिकता और बड़े पैमाने पर विस्तार की संभावनाओं के बीच संतुलन स्थापित करता है. यही वह रणनीतिक सोच है जो भविष्य में फोटोनिक AI को व्यावसायिक स्तर पर अपनाने का मार्ग प्रशस्त कर सकती है.

Continues below advertisement

डॉ. प्रमोद कुमार कहते हैं,“हर गणना अनिश्चितता और स्पष्टता के बीच होने वाला एक संवाद है. फोटोनिक इंटेलिजेंस हमें यह संवाद सीधे प्रकाश की संरचना में संचालित करने की क्षमता देती है, जहां संभावनाएं परिणामों में परिवर्तित होने से पहले एक साथ अस्तित्व में रहती हैं. ”यह विचार उनके पूरे शोध-दर्शन को प्रतिबिंबित करता है. उनके लिए बुद्धिमत्ता केवल सॉफ्टवेयर द्वारा उत्पन्न कोई परिणाम नहीं है, बल्कि ऐसी अभिव्यक्ति है जिसे भौतिक प्रणालियां भी अपने भीतर समाहित कर सकती हैं. QRDC की प्रयोगशालाओं में फोटोनिक एंट्रॉपी और ऑप्टिकल कैओटिसिटी जैसे उन्नत सिद्धांतों के माध्यम से संभावनाओं के विशाल आयामों का प्रत्यक्ष अध्ययन किया जा रहा है. स्पेशियल लाइट मॉड्यूलेटर्स की सहायता से डेटा को सीधे फेज-मॉड्यूलेटेड लेजर प्रणालियों में एन्कोड किया जाता है, जिससे प्रकाश की गति पर एक साथ अनेक संभावित समाधान खोजे जा सकते हैं. व्यावहारिक दृष्टि से देखें तो यह तकनीक तेज़ धोखाधड़ी पहचान प्रणालियों, अधिक सटीक विसंगति विश्लेषण, उन्नत स्वायत्त प्रणालियों और ऊर्जा-कुशल AI इन्फरेंस जैसे क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है. महत्वपूर्ण बात यह है कि QRDC की यह यात्रा अब केवल सिद्धांतों तक सीमित नहीं है. संस्थान का उत्पाद विकास रोडमैप अवधारणात्मक डिजाइन से आगे बढ़कर निर्माण-तैयार चिप्स तक पहुंच चुका है. वाणिज्यिक स्तर की फाउंड्री सिमुलेशन प्रक्रियाओं के माध्यम से इन डिजाइनों का सत्यापन किया जा चुका है और अब हार्डवेयर परीक्षण के चरण में प्रवेश किया जा रहा है. विज्ञान और प्रौद्योगिकी की दुनिया में यही वह पड़ाव होता है जहां अनेक महत्वाकांक्षी विचार वास्तविकता की कसौटी पर खरे नहीं उतर पाते. लेकिन QRDC में यह परिवर्तन अपेक्षा से कहीं अधिक तेज़ी से आगे बढ़ रहा है. जहां डॉ. सलमान अब्दुल्ला उत्पाद विकास का नेतृत्व कर रहे हैं, वहीं डॉ. प्रमोद कुमार वैज्ञानिक संरचना और दीर्घकालिक अनुसंधान दृष्टि का मार्गदर्शन कर रहे हैं. दोनों के नेतृत्व में संस्थान ने मध्य-पूर्व क्षेत्र के सबसे उन्नत फोटोनिक AI पारिस्थितिकी तंत्रों में अपनी पहचान बनाई है. Quantum.Tech Europe 2025 में मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान भी इस बात का प्रमाण है कि QRDC का कार्य अब क्षेत्रीय सीमाओं से आगे बढ़कर वैश्विक तकनीकी विमर्श का हिस्सा बन चुका है. हालांकि इस शोध का केंद्र केवल एक नई चिप विकसित करना नहीं है. इसके पीछे कंप्यूटिंग को लेकर एक व्यापक दार्शनिक दृष्टि भी है. ऐसे समय में जब AI का विकास अक्सर अधिक सर्वर, अधिक ऊर्जा खपत और अधिक संसाधनों की मांग से जुड़ा दिखाई देता है, Dr. Pramod Kumar का शोध एक वैकल्पिक संभावना प्रस्तुत करता है—एक ऐसा भविष्य जहां बुद्धिमत्ता का विस्तार केवल शक्ति के बल पर नहीं, बल्कि दक्षता, संतुलन और वैज्ञानिक सौंदर्य के साथ हो. और संभव है कि इसी सौंदर्य में छिपा हो वह संकेत, जो आने वाले मशीन युग की भाषा को परिभाषित करेगा—एक ऐसी भाषा, जिसकी बुनियाद इलेक्ट्रॉनों पर नहीं, बल्कि प्रकाश पर आधारित होगी.

Continues below advertisement

डिस्क्लेमर : यह स्पॉन्सर्ड आर्टिकल है. एबीपी नेटवर्क प्रा. लि. और/या एबीपी लाइव इस लेख के कंटेंट या इसमें व्यक्त विचारों का किसी भी रूप में समर्थन या अनुमोदन नहीं करता है. पाठकों से अनुरोध है कि वे अपनी समझ से निर्णय लें.