अंतिम दर्शन के लिए बेटे अर्जुन कपूर नम आंखों के साथ पहुंचे श्रीदेवी के घर
अपनी लाजवाब एक्टिंग के जरिए श्रीदेवी ने सबके दिलों में खास जगह बनाई. लेकिन एक शख्स ऐसा भी था जिसका दिल श्रीदेवी कभी नहीं जीत सकीं और वह शख्स भी उनके प्रति कभी अपनी नफरत कम नहीं कर पाया. यह शख्स कोई ओर नहीं श्रीदेवी के पति बोनी कपूर की पहली पत्नी का बेटा और अभिनेता अर्जुन कपूर हैं.
बॉलीवुड अभिनेत्री श्रीदेवी के निधन से बॉलीवुड समेत पूरा भारत दुखी है. श्रीदेवी आज पंचतत्व में विलीन हो जाएंगी. दिवंगत बॉलीवुड अभिनेत्री श्रीदेवी का पार्थिव शरीर दुबई से मुंबई आ चुका है. श्रीदेवी के पार्थिव शरीर को एयरपोर्ट से सीधे उनके लोखंडवाला के घर ग्रीन एकर्स लाया गया.
अर्जुन ने श्रीदेवी को कभी अपनी मां का दर्जा नहीं दिया, पर बोनी कपूर की मदद के लिए वो दुबई जरूर पहुंचे.
हालांकि वक्त की रेत ने कड़वे रिश्तों पर कुछ हद तक चादर जरूर डाली. अर्जुन अपने पिता के करीब तो आएं, लेकिन श्रीदेवी के साथ उनका रिश्ता कभी ठीक नहीं हुआ.
बता दें कि बोनी कपूर ने दो शादियां की थीं, पहले शादी मोना शौरी कपूर से और दूसरी शादी श्रीदेवी से. मोना कपूर ने दो बच्चों को जन्म दिया और उनमें सबसे बड़े अर्जुन कपूर हैं. अर्जुन कपूर की बहन नाम अंशुला है, वहीं श्रीदेवी की दो बेटियां हैं खुशी और जाह्नवी.
इतना ही नहीं उन्होंने कह दिया था कि ''श्रीदेवी और उनकी दोनों बेटियां मेरी जिंदगी में कोई मायने नहीं रखते और मेरे लिए श्रीदेवी मेरे पापा की पत्नी हैं इससे ज्यादा कुछ नहीं.''
पिछले साल मई महीने में एक इंटरव्यू के दौरान अर्जुन कपूर ने कहा था मैं जाह्नवी और खुशी से न कभी मिलता हूं और ना ही कभी उनके साथ समय बिताता हूं.
अर्जुन जब 11 साल के थे तब बोनी कपूर ने श्रीदेवी से शादी के लिए उनकी मां मोना कपूर को तलाक दे दिया था. अर्जुन के सीने में तब से श्रीदेवी के लिए सिर्फ और सिर्फ नफरत ही रही. मगर आज जब श्रीदेवी नहीं हैं ऐसे वक्त में अर्जुन अपने पिता बोनी कपूर के साथ खड़े नजर आ रहे हैं.
वैसे तो अक्सर यह बात कही जाती है कि वक्त के साथ इंसान सारी नफरत भूला देता है, पर अर्जुन कपूर के मन में 22 साल श्रीदेवी के लिए जो नफरत पनपी वह कभी कम नहीं हुई थी.
श्रीदेवी की मौत खबर पा कर अर्जुन कपूर अपने पिता का साथ देने उनके साथ दुबई रवाना हो गए थे. दुबई से श्रेदेवी का पार्थिव शरीर मुंबई एयरपोर्ट से होते हुए उनके ले जाया गया. ऐसे में अर्जुन हर पल अपने पिता का साथ देने वहां मौजूद थे.