जब भी कोई नई गाड़ी खरीदने का प्लान बनाता है, तो माइलेज सबसे बड़ा सवाल होता है. खासतौर पर यह चर्चा आम रहती है कि आखिर Diesel Cars, Petrol Cars के मुकाबले ज्यादा माइलेज क्यों देती हैं. हाईवे ड्राइव हो या लंबी दूरी की जर्नी , डीजल कारें अक्सर बेहतर एवरेज देने के लिए जानी जाती हैं. इसकी वजह सिर्फ कीमत या इंजन का साइज नहीं, बल्कि डीजल फ्यूल और इंजन की बनावट होती है. अगर आप भी यह समझना चाहते हैं कि डीजल कार माइलेज के मामले में पेट्रोल से आगे क्यों रहती है, तो इसके पीछे की तीन अहम वजहें जानना जरूरी है.

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डीजल फ्यूल में ज्यादा एनर्जी

  • डीजल कार के बेहतर माइलेज की सबसे बड़ी वजह डीजल फ्यूल में मौजूद ज्यादा एनर्जी है. पेट्रोल के मुकाबले डीजल में प्रति लीटर ज्यादा एनर्जी होती है. इसका मतलब यह है कि डीजल इंजन उसी मात्रा के फ्यूल से ज्यादा दूरी तय कर सकता है. यही कारण है कि डीजल कारें कम फ्यूल में लंबा सफर तय कर लेती हैं और माइलेज बेहतर निकलता है. सीधे शब्दों में कहें तो डीजल फ्यूल ज्यादा पावरफुल होता है.

ज्यादा कम्प्रेशन रेशियो

  • डीजल इंजन, पेट्रोल इंजन की तुलना में ज्यादा कम्प्रेशन रेशियो पर काम करते हैं. जहां पेट्रोल इंजन आमतौर पर 8:1 से 12:1 कम्प्रेशन पर चलता है, वहीं डीजल इंजन 20:1 या उससे भी ज्यादा कम्प्रेशन इस्तेमाल करता है. ज्यादा कम्प्रेशन का फायदा यह होता है कि फ्यूल ज्यादा अच्छे से और पूरी तरह जलता है. जब फ्यूल पूरी तरह बर्न होता है, तो हर बूंद से ज्यादा पावर मिलती है और माइलेज अपने आप बढ़ जाता है.

कम्प्रेशन इग्निशन टेक्नोलॉजी

  • पेट्रोल इंजन में फ्यूल को जलाने के लिए स्पार्क प्लग की जरूरत होती है, जबकि डीजल इंजन में ये Process अलग होती है. डीजल इंजन में हवा को बहुत ज्यादा दबाया जाता है, जिससे उसका तापमान इतना बढ़ जाता है कि डीजल फ्यूल अपने आप जलने लगता है. इस तकनीक को कम्प्रेशन इग्निशन कहा जाता है. इससे फ्यूल ज्यादा कंट्रोल में और बेहतर तरीके से जलता है, जिससे फ्यूल की बर्बादी कम होती है और माइलेज ज्यादा मिलता है.

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