Tyre Manufacturing: आज हम जिस भी गाड़ी को देखते हैं, चाहे वो कार हो, बाइक हो या ट्रक, उसके टायर हमेशा काले रंग के ही होते हैं. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि शुरुआत में टायर काले नहीं बल्कि सफेद और हल्के क्रीम रंग के हुआ करते थे.

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दुनिया के पहले रबर टायर करीब 125 साल पहले यानी 19वीं सदी के आखिर और 20वीं सदी की शुरुआत में बनाए गए थे.  उस समय टायर बनाने के लिए प्राकृतिक रबर का इस्तेमाल होता था और प्राकृतिक रबर का असली रंग दूध जैसा सफेद ही होता है.  इसी वजह से उस दौर के सभी टायर सफेद रंग के दिखते थे. आइए जानते हैं इसके बारे में पूरी जानकारी. 

रंग बदलने की असली वजह

सफेद रंग के ये शुरुआती टायर देखने में भले ही अच्छे लगते हों, लेकिन इनमें एक बड़ी कमी थी. और वो ये थी कि टायर ज्यादा मजबूत नहीं होते थे और गाड़ी का वजन उठाने में जल्दी घिस जाते थे, सामान्य रबर से बना टायर बहुत कम दूरी तय करने के बाद ही खराब हो जाता था. इस समस्या को दूर करने के लिए वैज्ञानिकों ने रबर में एक खास पदार्थ मिलाना शुरू किया, जिसे कार्बन ब्लैक कहा जाता है. 

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इसके अलावा कार्बन ब्लैक टायर को गर्मी सहने की ताकत भी देता है, क्योंकि गाड़ी चलते समय सड़क और टायर के बीच रगड़ से काफी गर्मी पैदा होती है. जैसे ही कंपनियों ने कार्बन ब्लैक का इस्तेमाल शुरू किया, टायर का रंग सफेद से बदलकर काला हो गया, और तभी से आज तक सभी गाड़ियों में काले रंग के ही टायर इस्तेमाल किए जाते हैं.

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आज भी दिखते हैं सफेद टायर के निशान

हालांकि कार्बन ब्लैक की वजह से टायर पूरी तरह काले हो गए, फिर भी कुछ पुरानी और सजावटी गाड़ियों में एक खास तरह के टायर देखे जाते थे, जिन्हें व्हाइटवॉल टायर कहा जाता है. इनमें टायर का साइड वाला हिस्सा यानी किनारा सफेद रंग का होता था, जबकि सड़क से सीधे संपर्क में आने वाला मुख्य हिस्सा काला ही रहता था.

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