What is Hydroplaning in Car: मानसून की बारिश जितनी गर्मी से राहत देती है तो गाड़ी चलाने वालों के लिए उतनी ही बड़ी चुनौती भी खड़ी करती है. अक्सर आपने देखा होगा कि तेज बारिश के दौरान अचानक चलती हुई कार फिसलने लगती है स्टीयरिंग बिल्कुल फ्री हो जाता है और ब्रेक लगाने पर भी गाड़ी कंट्रोल में नहीं आती. इस डरावनी सिचुएशन को ऑटोमोबाइल की दुनिया में 'हाइड्रोप्लेनिंग' (Hydroplaning) या 'एक्वाप्लेनिंग' कहा जाता है. 

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ज्यादातर लोग सोचते हैं कि ऐसा सिर्फ लापरवाही से गाड़ी चलाने की वजह से होता है, लेकिन इसके पीछे एक ठोस साइंटिफिक रीजन है. आइए बिल्कुल आसान शब्दों में समझते हैं कि आखिर बारिश में कार क्यों बेकाबू हो जाती है और इससे बचने का सही तरीका क्या है.

क्या है हाइड्रोप्लेनिंग?

जब सड़क पर पानी जमा होता है और आपकी कार एक तेज स्पीड में उसके ऊपर से गुजरती है, तो टायर के नीचे का पानी उतनी तेजी से बाहर नहीं निकल पाता जितनी तेजी से गाड़ी आगे बढ़ती है. ऐसे में टायर और सड़क के बीच पानी की एक पतली पानी की परत बन जाती है. 

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नतीजा यह होता है कि कार के टायरों का सड़क से सीधा संपर्क यानी ग्रिप पूरी तरह टूट जाती है. इस कंडीशन में आपकी कार सड़क पर चलने के बजाय पानी की उस पतली लेयर पर तैरने या स्केटिंग करने लगती है. यही वजह है कि स्टीयरिंग घुमाने या ब्रेक मारने पर भी कार कोई रिस्पॉन्स नहीं देती.

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खराब टायर और तेज स्पीड हैं इसके सबके बड़े विलेन 

हाइड्रोप्लेनिंग की स्थिति पैदा करने में दो चीजें सबसे ज्यादा जिम्मेदार होती हैं. पहली गाड़ी की तेज स्पीड और दूसरी टायरों की खराब हालत. जब गाड़ी की स्पीड 50 से 60 किमी/घंटा से ज्यादा होती है, तो हाइड्रोप्लेनिंग का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. 

इसके अलावा अगर आपकी कार के टायरों के ग्रूव्स घिस चुके हैं या टायरों में हवा का प्रेशर कम है, तो वे पानी को साइड में नहीं फेंक पाते. टायरों के ये खांचे सड़क से पानी हटाने का काम करते हैं, और जब ये पूरी तरह सपाट हो जाते हैं, तो गाड़ी पानी पर फिसलने लगती है.

क्या करें अगर गाड़ी फिसलने लगे तो?

अगर बारिश में आपकी कार कभी अचानक हाइड्रोप्लेनिंग का शिकार हो जाए, तो सबसे पहले घबराना बंद करें. ऐसी स्थिति में 90% लोग डरकर अचानक जोर से ब्रेक मार देते हैं या स्टीयरिंग को तेजी से मोड़ने लगते हैं, जो कि सबसे बड़ी गलती है. ऐसा करने से गाड़ी पूरी तरह स्पिन होकर पलट सकती है. 

सही तरीका यह है कि आप अपने पैर को एक्सीलेटर से पूरी तरह हटा लें ताकि गाड़ी की स्पीड अपने आप कम हो जाए. स्टीयरिंग व्हील को दोनों हाथों से मजबूती से सीधा पकड़ कर रखें और तब तक ब्रेक न लगाएं जब तक टायरों की सड़क पर दोबारा ग्रिप न बन जाए.

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