कार या बाइक खरीदते समय आपने अक्सर सुना होगा कि ज्यादा CC का मतलब ज्यादा पावर और ज्यादा स्पीड होता है. लेकिन यह बात पूरी तरह सही नहीं है. CC यानी Cubic Capacity इंजन के अंदर सिलेंडरों में मौजूद कुल डिसप्लेसमेंट को बताता है. जिसका मतलब होता है कि इंजन के आकार या क्षमता का एक माप. लेकिन सिर्फ CC देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि कोई गाड़ी कितनी तेज चलेगी या कितनी पावर देगी.
गाड़ी की परफॉर्मेंस समझने के लिए CC के साथ Power, Torque, वजन और गियरबॉक्स जैसी चीजों को भी देखना पड़ता है. कई बार कम CC वाला इंजन ज्यादा पावर दे सकता है, जबकि ज्यादा CC वाला इंजन बेहतर टॉर्क देने के लिए बनाया गया होता है. इसलिए अगर आप कार या बाइक खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो सिर्फ CC देखकर फैसला करने के बजाय यह समझना जरूरी है कि इंजन की क्षमता, पावर और स्पीड आपस में कैसे जुड़ी हैं.
CC आखिर होता क्या है?
CC का पूरा नाम Cubic Centimetre है. इंजन में जब पिस्टन ऊपर-नीचे चलता है, तो सिलेंडर के अंदर जितनी कुल जगह में हवा और ईंधन का मिश्रण काम करता है, उसका कुल डिसप्लेसमेंट CC में बताया जाता है.1000cc इंजन का displacement 1 लीटर होता है, जबकि 2000cc इंजन का displacement 2 लीटर. आमतौर पर बड़ा इंजन ज्यादा हवा और ईंधन को एक चक्र में जलाता है. इसलिए समान तकनीक वाले दो इंजनों में ज्यादा CC वाला इंजन अधिक पावर और टॉर्क देने की क्षमता रखता है.
CC देखकर परफॉर्मेंस नहीं पता चलती
इंजन की Power आमतौर पर हॉर्सपावर (HP) या किलोवाट (kW) में बताई जाती है. यह बताती है कि इंजन कितनी तेजी से काम कर सकता है. एक ही CC के दो इंजनों में अलग-अलग पावर हो सकती है. इसकी वजह इंजन डिजाइन, टर्बोचार्जर, फ्यूल इंजेक्शन, इंजन ट्यूनिंग, RPM और दूसरी तकनीकें होती हैं. एक छोटा टर्बो इंजन अपनी क्षमता के हिसाब से काफी ज्यादा पावर पैदा कर सकता है. इसलिए सिर्फ इंजन का CC देखकर उसकी परफॉर्मेंस का अंदाजा लगाना सही तरीका नहीं है.
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टॉर्क का क्या काम है?
Torque को आसान भाषा में इंजन की खींचने की ताकत समझ सकते हैं. इसे आमतौर पर Nm में मापा जाता है. ज्यादा टॉर्क का फायदा खासकर गाड़ी को तेजी से आगे बढ़ाने, चढ़ाई पर चलने या भारी वजन खींचने में महसूस होता है. यही कारण है कि दो गाड़ियों में अगर एक की पावर समान हो लेकिन टॉर्क ज्यादा हो, तो उसकी शुरुआती acceleration अलग महसूस हो सकती है.
गाड़ी की स्पीड कई चीजों पर निर्भर करती है
गाड़ी की टॉप स्पीड केवल CC पर निर्भर नहीं करती. इसमें कई चीजें मिलकर काम करती हैं. जैसे इंजन की Power और Torque, गियरबॉक्स के गियर रेशियो, गाड़ी का वजन, टायर और व्हील का आकार, Aerodynamics. जैसे अगर दो कारों में एक का इंजन 1500cc और दूसरी का 2000cc हो सकता है. फिर भी 1500cc वाली कार ज्यादा तेज हो सकती है, अगर उसका इंजन ज्यादा पावर देता है, वजन कम है और उसका गियरिंग सेटअप बेहतर है.
बाइक में भी यही नियम लागू होता है
बाइक्स में भी CC को देखकर सीधे स्पीड का अनुमान नहीं लगाया जा सकता. जैसे दो 200cc बाइक की performance अलग हो सकती है. एक का इंजन ज्यादा RPM पर ज्यादा पावर बना सकता है, जबकि दूसरी बाइक का इंजन कम RPM पर ज्यादा टॉर्क देने के लिए ट्यून किया गया हो सकता है. इसलिए बाइक खरीदते समय सिर्फ कितने CC की है पूछने के बजाय उसकी Power, Torque, Weight और Gear Ratio भी देखना चाहिए.
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