V2V Communication System : भारत में सड़क सुरक्षा को पहले से बेहतर बनाने के लिए केंद्र सरकार एक नई तकनीक लाने की तैयारी कर रही है. इस तकनीक का नाम व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) कम्युनिकेशन सिस्टम है. इसकी मदद से सड़क पर चल रहे वाहन आपस में जरूरी जानकारी शेयर कर सकेंगे, जिससे संभावित हादसे होने से पहले ही चालक को अलर्ट मिल जाएगा. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इसे लागू करने के लिए केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन का मसौदा जारी किया है. सरकार का मानना है कि यह तकनीक फ्यूचर के इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है. ऐसे में आइए जानते हैं कि क्या पुरानी गाड़ियों में भी वी2वी सिस्टम लगवा सकते हैं और कितना खर्च आएगा.
क्या है V2V कम्युनिकेशन सिस्टम?
V2V यानी व्हीकल-टू-व्हीकल कम्युनिकेशन ऐसी तकनीक है, जिसमें सड़क पर चल रहे वाहन रियल टाइम में एक-दूसरे से जानकारी शेयर करते हैं. इसमें वाहन अपनी स्पीड, लोकेशन, दिशा और ब्रेक लगाने जैसी जरूरी जानकारियां आसपास मौजूद अन्य वाहनों तक पहुंचाते हैं. अगर आगे चल रही कोई गाड़ी अचानक ब्रेक लगा देती है, लेन बदलने का खतरा होता है, सामने टक्कर की संभावना बनती है या आसपास कोई एंबुलेंस जैसी आपातकालीन गाड़ी आती है, तो पीछे चल रहे वाहन के चालक को तुरंत चेतावनी मिल जाती है. इससे चालक के पास प्रतिक्रिया देने के लिए ज्यादा समय मिलता है और दुर्घटना का खतरा कम हो सकता है.
मौजूदा सिस्टम से कैसे अलग है यह तकनीक?
अभी ज्यादातर मॉर्डन गाड़ियों में कैमरा, रडार और सेंसर आधारित एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन ये सिस्टम केवल वहीं तक जानकारी जुटा सकते हैं, जहां तक उनके सेंसर या चालक की सीधी नजर पहुंचती है. इसके अलग V2V तकनीक ऐसी जानकारी भी शेयर कर सकती है जो चालक को दिखाई नहीं देती है. सड़क के मोड़ के पीछे चल रही गाड़ी, ट्रैफिक के कारण छिपा हुआ वाहन या धुंध या कम रोशनी के समय वाली स्थिति में भी यह सिस्टम पहले से अलर्ट भेज सकता है.
किन सुविधाओं का मिलेगा फायदा?
एआईएस-230 (AIS-230) मानक के तहत यह तकनीक कई जरूरी सुरक्षा सुविधाओं को सपोर्ट करेगी. इनमें इमरजेंसी ब्रेक अलर्ट, फॉरवर्ड कोलिजन वार्निंग, गलत दिशा में आ रहे वाहन की सूचना साथ ही एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहनों का अलर्ट शामिल हैं.
कब से लागू होगा नया नियम?
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के मसौदे के अनुसार इसे L, M और N श्रेणी के वाहनों यानी दोपहिया, कार, बस और मालवाहक वाहनों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. 1 अक्टूबर 2027 या उसके बाद निर्मित जिन वाहनों में V2V सिस्टम लगाया जाएगा, उन्हें AIS-230 मानक का पालन करना होगा. 1 अक्टूबर 2028 या उसके बाद बनने वाले सभी नए L, M और N श्रेणी के वाहनों में यह प्रणाली जरूरी होगी. सरकार का कहना है कि चरणबद्ध तरीके से नियम लागू करने से वाहन निर्माता कंपनियों को नई तकनीक अपनाने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा.
क्या पुरानी गाड़ियों में भी लग सकेगा V2V सिस्टम?
सरकार की शुरुआती योजना के अनुसार V2V सिस्टम पहले नई गाड़ियों में जरूरी किया जाएगा. इसके बाद अगले चरण में पुरानी गाड़ियों में भी इसे रेट्रोफिट (Retrofit) के जरिए लगाने की योजना है. जिन वाहनों में फैक्ट्री से यह सिस्टम नहीं होगा, उनमें बाद में अलग से ऑन-बोर्ड यूनिट (OBU) लगाकर इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकेगा.
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पुरानी गाड़ी में लगवाने का कितना खर्च आएगा?
रिपोर्ट्स के मुताबिक V2V तकनीक के लिए लगने वाली ऑन-बोर्ड यूनिट (OBU) की अनुमानित कीमत 5,000 से 7,000 रुपये प्रति वाहन हो सकती है. हालांकि फिलहाल यह केवल अनुमानित लागत है. आखिरी कीमत तकनीकी मानकों के तय होने और वाहन कंपनियों के तहत सिस्टम विकसित किए जाने के बाद साफ होगी.
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