यूपी में पुरानी और पॉल्यूशन फैलाने वाली गाड़ियों के खिलाफ सरकार का अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है. राज्य सरकार की व्हीकल स्क्रैपेज पॉलिसी का असर अब साफ दिखाई देने लगा है. इस योजना के तहत फिटनेस टेस्ट में फेल होने वाली पुरानी गाड़ियों को सड़कों से हटाकर स्क्रैपिंग सेंटरों में कबाड़ बनाया जा रहा है. सरकार का कहना है कि इससे सड़कें पहले से ज्यादा सुरक्षित होंगी, प्रदूषण कम होगा और लोगों को नई और सुरक्षित गाड़ियां अपनाने के लिए भी प्रोत्साहन मिलेगा.

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आंकड़ों के मुताबिक, 30 जून 2026 तक उत्तर प्रदेश में 1.95 लाख से ज्यादा पुरानी गाड़ियां स्क्रैप की जा चुकी हैं. इनमें करीब 1.85 लाख प्राइवेट गाड़ियां, जैसे कार, बाइक और स्कूटर शामिल हैं जबकि 10 हजार से ज्यादा  सरकारी गाड़ियां भी कबाड़ किए गए हैं. राज्य सरकार ने साल 2023 में इस स्क्रैपेज पॉलिसी को लागू किया था और इसके बाद से पूरे सिस्टम को डिजिटल और ट्रांसपेरेंट बनाया गया है.

इन गाड़ियों को भेजा जाएगा स्क्रैपिंग सेंटर

राज्य में फिलहाल 101 रजिस्टर्ड व्हीकल स्क्रैपिंग फैसिलिटी मौजूद हैं. इनमें से लगभग 50 सेंटर पूरी तरह काम कर रहे हैं, जबकि जिन जिलों में अभी ऐसी सुविधा नहीं है, वहां नए स्क्रैपिंग सेंटर खोलने की प्रक्रिया जारी है. सरकार ने करीब 30 नए स्क्रैपिंग सेंटर के लिए आवेदन भी हासिल किए हैं. आने वाले समय में इनकी संख्या और बढ़ने की उम्मीद है, जिससे गाड़ी मालिकों को अपने पुराने वाहन स्क्रैप कराने में आसानी होगी.

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स्क्रैपेज पॉलिसी के तहत किसी भी पुरानी गाड़ी की पहले ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) पर मॉडर्न मशीनों से फिटनेस जांच की जाती है. अगर गाड़ी पहली बार में टेस्ट पास नहीं कर पाती तो उसे दोबारा जांच का मौका दिया जाता है. अगर दूसरी बार भी गाड़ी फिटनेस टेस्ट में फेल हो जाती है तो उसे एंड ऑफ लाइफ व्हीकल घोषित कर स्क्रैपिंग सेंटर में भेज दिया जाता है, जहां उसे वैज्ञानिक तरीके से नष्ट किया जाता है.

क्यों है ये सर्टिफिकेट इतना खास?

सरकार इस योजना के जरिए कार मालिकों को कई तरह के फायदे भी दे रही है. जब कोई शख्स अपनी पुरानी गाड़ी स्क्रैपिंग सेंटर में जमा करता है तो उसे सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट दिया जाता है. इस सर्टिफिकेट की मदद से नई कमर्शियल गाड़ी खरीदने पर रोड टैक्स में 10 फीसदी तक और नई कार, बाइक या स्कूटर खरीदने पर 15 फीसदी तक की छूट मिल सकती है. खास बात यह है कि इस सर्टिफिकेट को किसी दूसरे शख्स के नाम भी ट्रांसफर किया जा सकता है.

सरकार का मानना है कि इस पॉलिसी से सिर्फ प्रदूषण ही कम नहीं होगा, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी. इसके साथ ही ऑटोमोबाइल, स्टील, एल्यूमिनियम, कॉपर, प्लास्टिक और रबर रीसाइक्लिंग इंडस्ट्री को पर्याप्त कच्चा माल मिलेगा. इससे मैन्युफैक्चरिंग लागत कम करने में मदद मिलेगी और नए स्क्रैपिंग सेंटर खुलने से निवेश और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे.

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