आज के समय में गाड़ी चलाना सिर्फ सुविधा नहीं बल्कि जिम्मेदारी भी है. ट्रैफिक नियमों का पालन करना हर ड्राइवर के लिए जरूरी है और इन्हीं नियमों में एक अहम हिस्सा गाड़ी की नंबर प्लेट है. कई लोग नियमों को हल्के में लेते हैं और अलग दिखने के लिए नंबर प्लेट में छेड़छाड़ कर देते हैं. नंबर प्लेट में बदलाव करने से न सिर्फ भारी जुर्माना लग सकता है बल्कि कानूनी केस भी दर्ज हो सकता है. आइए डिटेल्स जानते हैं. 

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सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि नंबर प्लेट गाड़ी की पहचान होती है. जैसे हर शख्स का आधार या पहचान पत्र होता है, वैसे ही हर शख्स की एक यूनिक नंबर प्लेट भी होती है, जिसमें उसकी सारी डिटेल्स होती हैं. उदाहरण के तौर पर गाड़ी का मालिक कौन है, गाड़ी कहां रजिस्टर है और उसका रिकॉर्ड क्या है? इसलिए इसमें किसी भी तरह का बदलाव करना कानून के खिलाफ है. 

नंबर प्लेट से छेड़छाड़ करने पर ऐसे चलता है पता

आजकल सड़कों पर हाई-टेक कैमरे और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) सिस्टम लगाए गए हैं, जो गाड़ियों के नंबर को स्कैन करके तुरंत पहचान कर लेते हैं. ऐसे में कुछ लोग इन सिस्टम से बचने के लिए नंबर प्लेट के साथ छेड़छाड़ करते हैं. जैसे कोई वर्ड या अंक बदल देना, अलग तरह का फॉन्ट लगा देना या नंबर को तिरछा लिखना जैसी चीजें हैं, जिससे कैमरा नंबर साफ न पढ़ सके. ये कानून की नजर में गलत तरीके हैं.

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पुलिस और ट्रैफिक विभाग का कहना है कि अब तकनीक इतनी एडवांस हो चुकी है कि सिर्फ नंबर प्लेट ही नहीं, बल्कि गाड़ी का कलर, मॉडल, लोकेशन और समय जैसी कई चीजों को एक साथ मिलाकर जांच की जाती है. यानी अगर कोई शख्स सोचता है कि नंबर प्लेट बदलकर वह बच जाएगा, तो यह उसकी बड़ी गलतफहमी है. ऐसे मामलों को पकड़ने के लिए अब डेटा एनालिसिस और सर्विलांस सिस्टम का भी इस्तेमाल किया जा रहा है.

छेड़छाड़ करने पर लगेगा भारी जुर्माना

कानून की बात करें तो मोटर व्हीकल एक्ट के तहत नंबर प्लेट से छेड़छाड़ करने पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है. इसके अलावा गाड़ी को सीज किया जा सकता है और ड्राइवर या मालिक के खिलाफ आपराधिक मामला भी दर्ज हो सकता है. इतना ही नहीं अगर कोई मैकेनिक या वर्कशॉप इस तरह की गैरकानूनी मॉडिफिकेशन में मदद करता है तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जा सकती है. 

इसके अलावा सरकार ने हाई-सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) अनिवार्य कर दी है, जिसमें खास तरह के सिक्योरिटी फीचर्स होते हैं. इसका उद्देश्य यही है कि नंबर प्लेट के साथ छेड़छाड़ को रोका जा सके और गाड़ियों की सही पहचान की जा सके. 

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