Flop Cars in India: भारतीय बाजार में हर साल कई नई कारें लॉन्च होती हैं और अगर कोई प्रोडक्ट अच्छा है तो लोग उसे तुरंत खरीद लेते हैं. हालांकि, कई बार कुछ कारणों से अच्छी कारें भी देश में फ्लॉप हो जाती हैं. तो आइए आज हम जानते हैं कि कौन सी अच्छी कारें भारत में फ्लॉप हो गई हैं.


मारुति किजाशी


2011 में जब मारुति ने किजाशी को भारत में लॉन्च किया था, तब यह अपने समय से काफी आगे थी. यह एक अच्छी कार थी, लेकिन कई कारणों से यह असफल हो गई. सबसे बड़ी वजह यह थी कि मारुति ने इसे CBU मॉडल के तौर पर आयात करती थी, जिससे भारी कर चुकाना पड़ता था. इसकी कीमत करीब 16 लाख रुपये थी, जो उस समय के हिसाब से काफी महंगी थी. इसके अलावा, मारुति को कभी भी प्रीमियम ब्रांड के तौर पर नहीं देखा गया, इसलिए लोग कार के लिए इतनी रकम खर्च करने के बजाय दूसरे ब्रांड को प्राथमिकता देते थे. तब डीजल इंजन का न होना भी एक बड़ी कमी थी.



टोयोटा यारिस


टोयोटा यारिस; सियाज, वरना जैसी कारों को टक्कर देती थी. हालांकि, बिक्री में यह कभी भी सफल नहीं हुई. एक प्रोडक्ट के रूप में, यारिस एक अच्छे डिजाइन, ढेर सारे फीचर्स और ऑटोमेटिक गियरबॉक्स ऑप्शंस के साथ काफी दमदार कार थी. हालांकि, यह अपने ज्यादा प्राइस और कोई डीजल इंजन नहीं होने के कारण विफल रही. टोयोटा भारत के बाहर न्यू जेनरेशन यारिस को अभी भी बेचती है, लेकिन देश में इसकी वापसी की संभावना नहीं है.



स्कोडा ऑक्टेविया कॉम्बी


भारत में एस्टेट कारों ने कभी पॉपुलर्टी हासिल नहीं की और ऑक्टेविया कॉम्बी इसका एक उदाहरण थी. स्कोडा ने 2002 में ऑक्टेविया कॉम्बी को लॉन्च किया, लेकिन कम बिक्री के कारण इसे बंद कर दिया गया. ऑक्टेविया कॉम्बी में इसके यूरोपीय डिजाइन, सुपर प्रैक्टिकैलिटी और शानदार परफार्मेंस सहित कई खूबियों से लैस थी.



स्कोडा यति


स्कोडा यति एसयूवी सेगमेंट में एक नए डिजाइन के साथ आई थी, जिसका यूरोपीय डिजाइन और जर्मन क्वालिटी उस समय किसी भी अन्य एसयूवी की तरह नहीं थी. यह 2.0-लीटर इंजन के साथ आती थी जिसमें 4×2 और 4×4 कैपिबिलिटी थी. यति की कीमत टोयोटा फॉर्च्यूनर के बहुत करीब थी, इसलिए यह ज्यादा नहीं बिकी. बाद में स्कोडा ने अपने सभी बाजारों में यति को कोडियाक से बदल दिया.



टाटा हेक्सा


हेक्सा एक और ऐसी एसयूवी थी, जो समय से आगे थी. इसे आरिया से रिप्लेस किया गया था, जो बुरी तरह से फ्लॉप हो गई थी. हालांकि, जिन लोगों ने हेक्सा को चलाया है, वे इसकी ड्राइवेबिलिटी और कंफर्टेबिलिटी की बहुत तारीफ करते हैं. महिंद्रा XUV500 और टोयोटा इनोवा क्रिस्टा जैसे कंप्टीटर्स के कारण हेक्सा की बिक्री में बड़ी गिरावट आई. उस समय टाटा की ब्रांड इमेज महिंद्रा और टोयोटा से बहुत पीछे थी.



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