Supreme Court on Vehicle Insurance: हमारे देश में हर दिन बाइक और कार खरीदी जाती है. जबकि अब नए कार और बाइक खरदीने वालो के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है. सड़क सुरक्षा को मजबूत करने और दुर्घटना पीड़ितों को सही समय पर मुआवजा दिलाने के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक ऐलान किया है. कोर्ट ने देश में बिकने वाली सभी नई गाड़ियों के लिए अनिवार्य थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस की अवधि को एक-एक साल बढ़ाने का कड़ा निर्देश दिया है.
बता दें कि, जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने बीमा नियामक IRDAI को इस फैसले को तत्काल प्रभाव से लागू करने को कहा है. इस फैसले का सीधा असर नई गाड़ियाँ खरीदने वाले ग्राहकों की जेब और गाड़ियों की शुरुआती कीमत पर पड़ने वाला है. तो चलिए बेहद ही आसान भाषा में समझते हैं कि कोर्ट के इस नए नियम के क्या मायने हैं और इससे वाहन चालकों को क्या-क्या लाभ मिलेंगे.
बदला पूरी तरह से नियम
आपको बता दें कि, सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश के मुताबिक अब से शोरूम से नई कार खरीदते वक्त ग्राहकों को 3 साल के बजाय 4 साल का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस कवर लेना अनिवार्य होगा. वहीं, अगर आप कोई नई बाइक या स्कूटर खरीदते हैं तो आपको 5 साल के बजाय पूरे 6 साल का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस कवर एक साथ ही लेना पड़ेगा. साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने कारों के लिए 3 साल और टू-व्हीलर्स के लिए 5 साल का नियम लागू किया था.
जबकि अब आठ साल बाद कोर्ट ने पाया कि देश में चलने वाली कुल गाड़ियों में से लगभग 56 फीसदी वाहन अब भी बिना बीमा के सड़कों पर दौड़ रहे हैं. इसी लापरवाही को रोकने और लोगों को बीमा के दायरे में बनाए रखने के लिए अदालत ने अवधि को एक साल और बढ़ाने का सख्त कदम उठाया है.
यह भी पढ़ें: E20 फ्यूल विवाद गहराया, SIAM ने मानी बड़ी चूक?
नई गाड़ी खरीदते वक्त कितनी जेब कटेगी?
बता दें कि, इस नए नियम का सबसे पहला असर आपकी जेब पर नई गाड़ी की ऑन-रोड कीमत के रूप में दिखाई देगा. जब आप किसी शोरूम में नई कार या बाइक खरीदने जाएंगे तो आपको गाड़ी की कुल कीमत में एक अतिरिक्त साल के थर्ड-पार्टी बीमा का प्रीमियम शुरुआत में ही चुकाना होगा.
जिसके चलते नई कारों और बाइक्स की ऑन-रोड शुरुआती कीमत में थोड़ी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी. यानी जो गाड़ियां आप पहले खरीदते थे उनके मुकाबले अब शुरुआती बिल में कुछ हजार रुपये अतिरिक्त जुड़ जाएंगे जिससे नई गाड़ी खरीदना थोड़ा महंगा हो जायेगा.
इससे बीमा प्रीमियम कितना बढ़ जाएगा?
वहीं, अब बीमा प्रीमियम की बात करें तो थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की दरें गाड़ी के इंजन के हिसाब से सरकार और IRDAI तय करती हैं. जानकारी के लिए बता दें कि, अगर किसी कार का सालाना थर्ड-पार्टी प्रीमियम लगभग 2,000 से 4,000 रुपये के बीच है तो 3 साल के बजाय 4 साल का कवर लेने पर आपको लगभग 2,000 से 4,000 रुपये का एकमुश्त अतिरिक्त प्रीमियम देना होगा.
जबकि ठीक इसी तरह टू-व्हीलर्स में एक अतिरिक्त साल का थर्ड-पार्टी प्रीमियम जुड़ जाने से बाइक के कुल इंश्योरेंस बिल में इंजन क्षमता के आधार पर लगभग 700 रुपये से लेकर 1,500 रुपये तक का इजाफा हो जाएगा. लेकिन यह भी ध्यान रखना है कि, यह बढ़ोतरी केवल अनिवार्य थर्ड-पार्टी हिस्से पर होगी अपनी गाड़ी के नुकसान वाले बीमा की अवधि पहले की तरह ही रहेगी.
इस फैसले से वाहन चालकों क्या होगा फायदा?
बता दें कि, भले ही नई कार या बाइक खरीदने में थोड़े पैसे ज्यादा खर्च होंगे लेकिन आम वाहन चालकों और समाज के लिए इसके कई बड़े फायदे हैं. पहला बार-बार रिन्यू कराने की झंझट से आपको आजादी मिल जाएगी. जबकि इसके अलावा आने वाले सालों में अगर थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की दरें बढ़ती भी हैं तो भी आप शुरुआती 4 या 6 सालों तक पुरानी और तय दर पर ही सुरक्षित रहेंगे.
तीसरा फायदा यह होगा कि, सड़क दुर्घटना होने पर पीड़ित परिवार या दूसरे पक्ष को बिना किसी कानूनी अड़चन के समय पर बीमा कंपनी से कानूनी मुआवजा मिल सकेगा. इससे गाड़ी मालिक पर अचानक बड़ा आर्थिक बोझ या जेल जाने का खतरा नहीं रहेगा. वहीं, चौथा फायदा यह होगा कि, कोर्ट ने कंपनियों को 4-स्तरीय बीमा संरचना देने का भी निर्देश दिया है जिसमें थर्ड-पार्टी के साथ-साथ यात्री, ड्राइवर और गाड़ी के नुकसान के कवर को ग्राहक आसानी से अपनी पसंद से चुन सकेंगे.
यह भी पढ़ें: Creta EV खरीदने का प्लान? 2 लाख रुपये डाउन पेमेंट पर जानें EMI
Car loan Information:
Calculate Car Loan EMI