जब भी कोई व्यक्ति नई कार खरीदने जाता है, तो उसके सामने पेट्रोल और डीजल इंजन का विकल्प जरूर आता है. कुछ लोगों को पेट्रोल कार की स्मूद ड्राइविंग पसंद आती है, तो कुछ डीजल कार के ज्यादा टॉर्क और बेहतर माइलेज को प्राथमिकता देते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर एक ही काम करने वाले ये दोनों इंजन गाड़ी को अलग-अलग तरीके से पावर कैसे देते हैं? दोनों में ईंधन जलता है, इंजन के अंदर पिस्टन ऊपर-नीचे चलते हैं और पहियों तक ताकत पहुंचती है. इसके बावजूद दोनों की परफॉर्मेंस में काफी अंतर देखने को मिलता है.
दरअसल पेट्रोल और डीजल इंजन के काम करने का तरीका अलग होता है. पेट्रोल इंजन में ईंधन को जलाने के लिए स्पार्क प्लग की मदद ली जाती है, जबकि डीजल इंजन में हवा को इतना दबाया जाता है कि उसमें डाला गया डीजल खुद ही जलने लगता है. इसी तकनीकी अंतर की वजह से दोनों इंजन की पावर, टॉर्क, माइलेज और ड्राइविंग का अनुभव अलग-अलग होता है.
पेट्रोल इंजन में ऐसे पैदा होती है ताकत
पेट्रोल इंजन को स्पार्क इग्निशन इंजन कहा जाता है. इसमें सबसे पहले हवा और पेट्रोल को मिलाकर सिलेंडर में भेजा जाता है. इसके बाद पिस्टन इस मिक्चर को दबाता है. जब यह मिक्चर सही स्थिति में पहुंचता है, तो स्पार्क प्लग चिंगारी पैदा करता है. इस चिंगारी से पेट्रोल और हवा का मिक्चर जलता है और तेजी से फैलने वाली गैस पिस्टन को नीचे धकेलती है. पिस्टन की यह गति क्रैंकशाफ्ट के जरिए घूमने वाली ताकत में बदल जाती है. इसके बाद ट्रांसमिशन सिस्टम इस ताकत को पहियों तक पहुंचाता है. पेट्रोल इंजन आमतौर पर ज्यादा RPM पर बेहतर पावर देने के लिए जाने जाते हैं. इसलिए इनकी ड्राइविंग तेज रफ्तार और स्मूद एक्सीलरेशन के लिए पसंद की जाती है.
डीजल इंजन में तरीका अलग
डीजल इंजन का तरीका पेट्रोल इंजन से अलग होता है. इसे कंप्रेशन इग्निशन इंजन कहा जाता है. इसमें पहले सिलेंडर के अंदर केवल हवा भरी जाती है. इसके बाद पिस्टन इस हवा को बहुत ज्यादा दबाता है. हवा का दबाव बढ़ने से उसका तापमान काफी ज्यादा हो जाता है. इसी गर्म हवा में फ्यूल इंजेक्टर के जरिए डीजल का छिड़काव किया जाता है. गर्म हवा के संपर्क में आते ही डीजल अपने आप जलने लगता है. इससे पैदा हुआ दबाव पिस्टन को नीचे धकेलता है और इंजन को ताकत मिलती है. यही वजह है कि सामान्य डीजल इंजन में पेट्रोल इंजन की तरह स्पार्क प्लग की जरूरत नहीं होती.
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डीजल इंजन में ज्यादा टॉर्क मिलता है
डीजल इंजन की सबसे बड़ी खासियत उसका टॉर्क है. टॉर्क का मतलब इंजन की घुमाने वाली ताकत से है. सामान्य तौर पर डीजल इंजन कम RPM पर ही अच्छा टॉर्क पैदा कर सकते हैं. इसके पीछे ज्यादा कंप्रेशन रेशियो और ईंधन जलने के दौरान पैदा होने वाला दबाव अहम भूमिका निभाते हैं. यही वजह है कि डीजल कारें भारी सामान ले जाने, चढ़ाई चढ़ने और हाईवे पर लंबी दूरी तय करने के लिए अच्छी मानी जाती हैं. वहीं पेट्रोल इंजन में आमतौर पर ज्यादा RPM पर बेहतर पावर मिलती है. इसलिए स्पोर्टी ड्राइविंग और तेज एक्सीलरेशन के लिए पेट्रोल इंजन पसंद किए जाते हैं.
पेट्रोल कार का माइलेज कम होता है
पेट्रोल और डीजल के बीच माइलेज का अंतर भी उनके काम करने के तरीके से जुड़ा है. डीजल इंजन का कंप्रेशन रेशियो ज्यादा होता है और यह सामान्य तौर पर ईंधन की ऊर्जा का बेहतर इस्तेमाल कर पाता है. इसके अलावा डीजल में प्रति लीटर ऊर्जा की मात्रा भी पेट्रोल से ज्यादा होती है. यही वजह है कि समान परिस्थितियों में डीजल कार अक्सर पेट्रोल कार से बेहतर माइलेज देती है.
दोनों इंजनों की आवाज और मेंटेनेंस में अंतर
पेट्रोल इंजन आमतौर पर कम शोर और वाइब्रेशन के साथ चलते हैं. वहीं डीजल इंजन में ज्यादा कंप्रेशन और फ्यूल इंजेक्शन की प्रोसेस के कारण आवाज और वाइब्रेशन ज्यादा होते हैं. मेंटेनेंस की बात करें तो डीजल इंजन में हाई-प्रेशर फ्यूल इंजेक्शन सिस्टम और कुछ मॉडलों में डीजल पार्टिकुलेट फिल्टर (DPF) जैसी तकनीक होती है. इनकी देखभाल जरूरी होती है. दूसरी तरफ पेट्रोल इंजन में स्पार्क प्लग और इग्निशन सिस्टम की नियमित जांच करनी पड़ती है.
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