Check Petrol Purity Pump: भारत में आजकल हर तरफ एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल की चर्चा चल रही है. इस फ्यूल को लेकर लोगों के बीच गुस्सा भी देखने को मिल रहा है. जबकि सरकार लगातार इसके फायदे बता रही है. साथ ही सोशल मीडिया पर चर्चा हो रही है कि, गाड़ियों में नॉर्मल पेट्रोल की जगह ज्यादा एथेनॉल वाला फ्यूल भरा जा रहा है. जिससे इंजन खराब हो रहे हैं.
सोशल मीडिया पर फैल रहे इन विवादों को लेकर कार और बाइक मालिकों के मन में सबसे बड़ा डर यही है कि उनकी गाड़ी के टैंक में जो फ्यूल जा रहा है वह कितना शुद्ध है. जबकि अगर आप भी इस बात को लेकर परेशान हैं तो आज हम आपको कुछ बेहद आसान तरीके बताएंगे जिससे आप खुद ही फ्यूल की सही पहचान कर सकते हैं.
स्टीकर को ध्यान से देखें
बता दें कि, जब भी आप पेट्रोल पंप पर जाएं तो सबसे पहले अपनी नजर फ्यूल नोजल के पास मौजूद मशीन के डिजिटल बोर्ड और उस पर लगे स्टीकर पर डालें. सरकार के सख्त नियमों के मुताबिक हर पेट्रोल पंप को अपने डिस्पेंसर पर साफ अक्षरों में लिखना होता है कि उस मशीन से कौन सा फ्यूल निकल रहा है.
अगर मशीन पर E10 लिखा है तो इसका मतलब उसमें 10% एथेनॉल है, E20 का मतलब 20% और E85 का मतलब 85% एथेनॉल मिक्स ईंधन है. अपनी गाड़ी की मैनुअल गाइड बुक के हिसाब से ही सही स्टीकर वाली मशीन से तेल भरवाएं.
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करें फिल्टर पेपर टेस्ट
आपको जब भी लगता है कि पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बहुत ज्यादा है या उसमें पानी मिलाया गया है. तो आप मौके पर ही उसकी शुद्धता जांच सकते हैं. उपभोक्ता अधिकारों के तहत हर पेट्रोल पंप पर फिल्टर पेपर होना अनिवार्य है.
आप पंप कर्मी से फिल्टर पेपर मांगें और उस पर पेट्रोल की कुछ बूंदें गिराएं. अगर पेट्रोल पूरी तरह शुद्ध होगा तो वह बिना कोई दाग छोड़े हवा में उड़ जाएगा. लेकिन अगर कागज पर गहरा धब्बा रह जाता है या कोई रंगीन लकीर दिखती है, तो समझ जाइए कि ईंधन में गड़बड़ी की गई है.
आंकड़ों पर रखें हमेशा नज़र
आपको बता दें कि, पेट्रोल की शुद्धता और उसकी सही कैटेगरी पहचानने का सबसे सटीक वैज्ञानिक तरीका है उसकी डेंसिटी चेक करना. हर पेट्रोल पंप की मशीन पर हर रोज सुबह तेल की डेंसिटी अपडेट की जाती है जो कि डिस्प्ले स्क्रीन पर साफ दिखाई देती है.
सामान्य पेट्रोल की डेंसिटी 720 से 775 किलोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर के बीच होनी चाहिए. अगर स्क्रीन पर दिख रहा आंकड़ा इस तय सीमा से बहुत कम या बहुत ज्यादा है तो इसका सीधा मतलब है कि फ्यूल की क्वालिटी के साथ छेड़छाड़ हुई है.
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