दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए सरकार ने सख्त कदम उठाया है. अब राजधानी में “No PUC, No Fuel” नियम लागू कर दिया गया है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार, जिन वाहनों के पास वैध Pollution Under Control (PUC) सर्टिफिकेट नहीं होगा, उन्हें पेट्रोल, डीजल या CNG नहीं दिया जाएगा. इसके लिए सभी पेट्रोल पंपों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि वे बिना PUC वाले वाहनों को फ्यूल न दें.
पेट्रोल पंप पर बिना PUC पहुंचने पर क्या होगा?
अगर आप बिना वैध PUC सर्टिफिकेट के पेट्रोल पंप पर पहुंचते हैं, तो आपको फ्यूल नहीं मिलेगा. पंप कर्मचारी आपसे PUC सर्टिफिकेट मांग सकते हैं और अगर आपके पास यह नहीं है, तो वे पेट्रोल या डीजल देने से मना कर देंगे. यह नियम प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से लागू किया गया है, ताकि लोग समय पर अपना PUC बनवाएं.
मोटर व्हीकल एक्ट क्या कहता है?
मोटर व्हीकल एक्ट के तहत हर वाहन के लिए वैध PUC सर्टिफिकेट रखना अनिवार्य है. अगर कोई व्यक्ति बिना PUC के वाहन चलाते हुए पकड़ा जाता है, तो उसे भारी जुर्माना देना पड़ सकता है. जुर्माना 1,000 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक हो सकता है. इसके अलावा 3 से 6 महीने तक की जेल भी हो सकती है. ये नियम पर्यावरण की सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं और इनका पालन करना जरूरी है.
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला क्या कहता है?
State of M.P. v. Centre for Environment Protection Research and Development मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर साफ रुख रखा है. कोर्ट ने कहा कि जिन वाहनों के पास वैध PUC सर्टिफिकेट नहीं है, उन्हें फ्यूल देने से पूरी तरह नहीं रोका जा सकता. अदालत के अनुसार, पर्यावरण संरक्षण के लिए सख्त कदम जरूरी हैं, लेकिन वे कानून के दायरे में ही होने चाहिए. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा मोटर वाहन कानूनों के तहत न तो NGT और न ही राज्य सरकारें ऐसा पूर्ण प्रतिबंध लगा सकती हैं कि बिना PUC वाले वाहन को फ्यूल ही न मिले.
क्यों व्यावहारिक नहीं है यह नियम?
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना कि “No PUC No Fuel” जैसा सख्त नियम व्यवहारिक नहीं है. अगर फ्यूल ही नहीं मिलेगा, तो वाहन मालिक अपने वाहन को PUC टेस्ट सेंटर तक भी नहीं ले जा पाएंगे. इससे समस्या का समाधान होने के बजाय और मुश्किलें बढ़ सकती हैं.
ड्राइविंग लाइसेंस पर भी असर
बिना PUC के गाड़ी चलाने पर सिर्फ जुर्माना ही नहीं, बल्कि आपका ड्राइविंग लाइसेंस भी सस्पेंड किया जा सकता है. कुछ मामलों में लाइसेंस को डिसक्वालिफाई भी किया जा सकता है, जिससे भविष्य में गाड़ी चलाने में परेशानी हो सकती है.
कब बनवाना जरूरी है PUC
नई गाड़ी के लिए PUC सर्टिफिकेट एक साल बाद बनवाना जरूरी होता है. वहीं, पुरानी गाड़ियों के लिए हर 6 महीने में PUC सर्टिफिकेट रिन्यू करवाना अनिवार्य है. यह एक आसान और कम खर्च वाला प्रोसेस है, जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. बता दें कि इस सख्ती से लोगों में जागरूकता बढ़ेगी और ज्यादा वाहन मालिक समय पर PUC बनवाएंगे. इससे सड़कों पर चलने वाले प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की संख्या कम होगी और हवा की गुणवत्ता में सुधार आ सकता है.
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