New EV Battery Technology: आजकल मार्केट में हमें कई प्रकार की नई-नई EV गाड़ियां देखने को मिलती हैं. इलेक्ट्रिक व्हीकल की डिमांड भी अब काफी बढ़ गई है. लेकिन इसके बाद भी इलेक्ट्रिक व्हीकल इस्तेमाल कर रहे लोगों के दिमाग में हमेशा एक डर बना रहता है. कहीं बीच रास्ते में बैटरी धोखा न दे दें या बैटरी कब खराब हो जाएगी, पता कैसे चलेगा? और भी कई तरह के सवाल. 

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लेकिन अब रिसर्चर्स ने EV मालिकों की इस सबसे बड़ी टेंशन का तोड़ निकाल लिया है. एक बेहद एडवांस और नई बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) तकनीक डेवलप की गई है, जो गाड़ी चलते समय ही यानी रियल टाइम में यह बता देगी कि बैटरी के अंदरूनी हिस्से (सेल्स) कब और कितने कमजोर हो रहे हैं. तो चलिए जानतें हैं कि, यह नया तकनीक कैसे काम करती है.

क्या है यह नई तकनीक?

अभी जो इलेक्ट्रिक गाड़ियां हैं उसमें जो बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम होता है वह सिर्फ वोल्टेज, करंट और तापमान को ऊपर-ऊपर से मापता है. इसमें दिक्कत यह है कि जब तक बैटरी की परफॉर्मेंस एकदम गिर नहीं जाती, तब तक अंदरूनी खराबी का पता ही नहीं चल पाता है. 

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हालांकि, नई तकनीक इलेक्ट्रोकेमिकल इम्पीडेंस स्पेक्ट्रोस्कोपी (EIS) का इस्तेमाल करती है. यह सिस्टम सेंसर की मदद से बैटरी सेल्स के अंदरूनी इलेक्ट्रॉनिक रेजिस्टेंस को सीधे मापता है. इससे बैटरी के अंदर की सटीक और असली कंडीशन का तुरंत पता चल जाता है.

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पहले ही मिल जाएगा डैमेज का अलर्ट

नई एडवांस तकनीक को तैयार करने के लिए वैज्ञानिकों ने लैब में बैटरी सेल्स को जानबूझकर डैमेज किया और उससे मिले डेटा से एक बेहद स्मार्ट एल्गोरिदम तैयार किया. अब यह एल्गोरिदम असली दुनिया में गाड़ी चलाते समय भी बैटरी के अंदर होने वाले छोटे से छोटे नुकसान या खराबी को तुरंत पकड़ लेगा. 

इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि किसी भी संभावित सुरक्षा जोखिम या शॉर्ट सर्किट जैसी गंभीर स्थिति के आने से पहले ही ड्राइवर को अलर्ट मिल जाएगा, जिससे बड़ी दुर्घटनाओं को भी आसानी से टाला जा सकता है.

सुधरेगी बैटरी की लाइफ

कई इलेक्ट्रिक वाहनों के मालिकों को लगता है कि इतने सारे फीचर्स आने के बाद बैटरी का साइज या गाड़ी का वजन बढ़ जाएगा, लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. रिसर्चर्स का दावा है कि इस कमाल के सिस्टम को लगाने के बाद भी मौजूदा बैटरी पैक के आकार या वजन में कोई बदलाव नहीं होगा. 

यह तकनीक चुपचाप अंदरूनी फिजिकल बदलावों को ट्रैक करके बैटरी की लाइफ-साइकल, सेफ्टी और परफॉर्मेंस को कई गुना बढ़ा देगी. अब इस प्रोजेक्ट को कमर्शियल लेवल पर लाने की तैयारी चल रही है, ताकि जल्द ही यह आपकी नई इलेक्ट्रिक गाड़ियों में दिख सके.

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