Delhi Truck Green Tax Hike: दिल्ली सरकार प्रदूषण को लेकर प्रतिदिन कुछ न कुछ नया नियम लेकर आ रही है. जिसके चलते अगर आप दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं या आपका कोई ऐसा बिजनेस है जिसमें ट्रकों से सामान इधर-उधर होता है तो यह खबर आपको थोड़ा परेशान कर सकती है. दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए अब बाहर से आने वाले ट्रकों और कमर्शियल गाड़ियों पर ग्रीन टैक्स यानी एनवायरनमेंट कंपनसेशन चार्ज (ECC) को बढ़ा दिया गया है. 

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लागू हुए इस फैसले से ट्रांसपोर्ट सेक्टर में खलबली मच गई है. टैक्स बढ़ने का सीधा असर ट्रकों के फेरों पर पड़ रहा है, जिससे ट्रांसपोर्टर्स के साथ-साथ अब आम जनता को भी महंगाई का तगड़ा झटका लगने का डर सताने लगा है. तो चलिए जानतें हैं कि, अब ट्रकों के मालिकों को कितना ग्रीन टैक्स देना पड़ेगा?

कितना बढ़ा ग्रीन टैक्स?

नए नियमों के लागू होने के बाद दिल्ली में एंट्री करने वाले भारी वाहनों को अब पहले के मुकाबले काफी ज्यादा टैक्स चुकाना होगा. बता दें कि, दो-एक्सल (two-axle) वाले ट्रकों के लिए ग्रीन टैक्स अब 1,400 रुपये से बढ़ाकर सीधा 2,000 रुपये कर दिया गया है. 

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वहीं, जो बड़े ट्रक (तीन या चार एक्सल वाले) पहले 2,600 रुपये टैक्स देते थे, उन्हें अब सीधे 4,000 रुपये का भुगतान करना पड़ रहा है. इतना ही नहीं, सरकार ने हर साल इसमें 5% की बढ़ोतरी का नियम भी जोड़ दिया है, ताकि लोग दिल्ली के बाईपास रास्तों का इस्तेमाल करें.

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क्यों हो रहा है इस नियम का भारी विरोध?

अचानक हुई टैक्स बढ़ोतरी से ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) समेत कई बड़े ट्रांसपोर्ट संगठन बेहद गुस्से में हैं. ट्रांसपोर्टर्स का कहना है कि डीजल की आसमान छूती कीमतों के बीच इस तरह टैक्स बढ़ाना उनके कारोबार की कमर तोड़ने जैसा है. 

दिल्ली-एनसीआर की सीमाओं पर रोज हजारों ट्रकों का आना-जाना होता है, ऐसे में हर एंट्री पर हजारों रुपये एक्स्ट्रा देना उनके बजट से बाहर हो रहा है. इसके विरोध में कई जगह चक्का जाम और हड़ताल जैसी स्थिति भी देखने को मिल रही है, जिससे माल की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है.

ग्राहकों की भी बढ़ी टेंशन

अब आप सोच रहे होंगे कि ट्रकों पर टैक्स बढ़ा है तो इसमें आपको टेंशन क्यों होगी. लेकिन जब ट्रांसपोर्टर्स की लागत बढ़ेगी, तो वे माल ढुलाई का किराया भी बढ़ाएंगे. दिल्ली की आजादपुर जैसी बड़ी मंडियों में फल, सब्जियां, राशन और दूसरा जरूरी सामान इन्हीं ट्रकों के जरिए दूसरे राज्यों से आता है. 

किराया महंगा होने का सीधा मतलब यह है कि आने वाले दिनों में आपके घर का बजट भी बिगड़ने वाला है. रोजमर्रा की चीजें, दूध, फल और सब्जियां महंगी होने की पूरी आशंका बनी हुई है.

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