अगर आप आने वाले सालों में नई कार खरीदने की सोच रहे हैं तो यह खबर आपके काम की है. केंद्र सरकार देश में कारों की ईंधन खपत यानी माइलेज से जुड़े नियमों को और सख्त करने की तैयारी कर रही है. बिजली मंत्रालय ने गुरुवार को Corporate Average Fuel Economy - CAFE-III का ड्राफ्ट जारी कर दिया है और इस पर ऑटो इंडस्ट्री विशेषज्ञों और आम लोगों से 6 अगस्त 2026 तक सुझाव मांगे हैं.
किन गाड़ियों पर लागू होंगे नए नियम?
मंत्रालय के मुताबिक, CAFE-III नियम M1 कैटेगरी की पैसेंजर कारों पर लागू होंगे. इसमें ड्राइवर समेत अधिकतम 9 लोगों की क्षमता वाली और 3500 किलोग्राम तक वजन वाली प्राइवेट कारें शामिल हैं. इसका मतलब यह है कि भारत में बिकने वाली लगभग सभी सामान्य कारें इसके दायरे में आएंगी. प्रस्ताव के अनुसार, ये नियम 2027-28 से 2031-32 के बीच भारत में बनने या आयात होने वाली कारों पर लागू होंगे.
CAFE नियम आखिर होते क्या हैं?
CAFE यानी Corporate Average Fuel Economy ऐसे नियम हैं, जो कार कंपनियों की पूरी गाड़ियों की फ्लीट का औसत ईंधन खर्च तय करते हैं. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कंपनियां ऐसी कारें बनाएं, जो कम ईंधन खर्च करें और कम कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) बनाएं.
यह नियम किसी एक कार पर नहीं, बल्कि कंपनी द्वारा बेची गई सभी कारों के औसत पर लागू होते हैं. अगर कोई कंपनी ज्यादा ईंधन खपत वाली गाड़ियां बेचती है तो उसे संतुलन बनाने के लिए बेहतर माइलेज वाली हाइब्रिड या इलेक्ट्रिक गाड़ियां भी बेचनी पड़ती हैं. यही वजह है कि पिछले कुछ वर्षों में कंपनियों का फोकस ईंधन दक्ष तकनीकों पर बढ़ा है.
भारत में ये नियम Energy Conservation Act के तहत लागू किए जाते हैं और इन्हें Bureau of Energy Efficiency लागू करता है. फिलहाल देश में CAFE-II मानक लागू हैं जो 2022-23 से प्रभावी हैं.
आपकी जेब पर क्या असर होगा?
- अगर नए नियम मौजूदा प्रस्ताव के मुताबिक लागू होते हैं तो आने वाले वर्षों में नई कारें पहले के मुकाबले ज्यादा माइलेज दे सकती हैं.
- इसका मतलब होगा कि पेट्रोल और डीजल पर आपका खर्च कम हो सकता है. साथ ही ऑटो कंपनियां हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी भी बढ़ा सकती हैं, ताकि उनके पूरे फ्लीट का औसत तय सीमा के भीतर रहे.
- दूसरी तरफ नई तकनीक, बेहतर इंजन और अतिरिक्त सिस्टम लगाने की वजह से कारों की शुरुआती कीमत कुछ बढ़ने की आशंका भी बनी रहेगी. यानी कार खरीदते समय कीमत थोड़ी ज्यादा हो सकती है, लेकिन लंबे समय में ईंधन की बचत से इसकी भरपाई हो सकती है.
सुझाव कब और कैसे भेज सकते हैं?
बिजली मंत्रालय ने कहा है कि ड्राफ्ट CAFE-III नियमों पर सुझाव और आपत्तियां 6 अगस्त 2026 तक भेजी जा सकती हैं. सुझावों पर विचार करने के बाद सरकार अंतिम नियम जारी करेगी.
पहले भी हो चुकी है लंबी बहस
CAFE-III को लेकर पिछले करीब एक साल से सरकार और ऑटो इंडस्ट्री के बीच चर्चा चल रही है. पिछले साल BEE के शुरुआती मसौदे में मौजूदा मानकों को और सख्त करने का प्रस्ताव रखा गया था, जिस पर कंपनियों ने अलग-अलग सुझाव दिए थे.
सबसे बड़ी बहस छोटी कारों को अतिरिक्त छूट देने को लेकर रही. एक ओर कुछ वाहन निर्माता छोटी कारों के लिए अलग मानक चाहते थे, जबकि दूसरी ओर कई कंपनियों ने इसका विरोध किया. अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि सार्वजनिक सुझावों के बाद सरकार अंतिम CAFE-III नियमों में क्या बदलाव करती है.
CAFE-III को लेकर पिछले करीब एक साल से सरकार और कार इंडस्ट्री के बीच चर्चा चल रही है. सितंबर 2025 में BEE ने एक शुरुआती ड्राफ्ट सर्कुलेट किया था, जिस पर इंडस्ट्री से काफी फीडबैक आया था. उस ड्राफ्ट में फ्लीट का औसत CO2 उत्सर्जन मौजूदा करीब 113 ग्राम प्रति किलोमीटर से घटाकर लगभग 91.7 ग्राम प्रति किलोमीटर करने का प्रस्ताव था.
नोट: अभी केवल ड्राफ्ट जारी होने और सुझाव आमंत्रित करने की जानकारी दी गई है. CO₂ उत्सर्जन के लक्ष्य, माइलेज के अनुमान या छोटी कारों से जुड़े प्रावधानों का अंतिम विवरण ड्राफ्ट दस्तावेज सार्वजनिक होने के बाद ही साफ होगा.
ये भी पढ़ें: गाड़ी किसी और ने चलाई और चालान आपके नाम आया, जानें अब क्या कर सकते हैं आप?
Car loan Information:
Calculate Car Loan EMI