Minor Driving Penalty Law: आजकल के युवा बाइक और कार चलाने के बहुत शौकीन हैं. जिसके चलते उनके माता-पिता भी अपने बच्चों को शौक-शौक में घर का कोई छोटा-मोटा काम निपटाने के लिए कार या बाइक की चाबी थमा देते हैं. बच्चे भी बिना ड्राइविंग लाइसेंस के सड़कों पर तेज रफ्तार में गाड़ी दौड़ाते नजर आते हैं. लेकिन अगर आप भी ऐसी गलती कर रहे हैं तो तुरंत सावधान हो जाएं. क्योंकि, सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने और नाबालिगों की ड्राइविंग को रोकने के लिए ट्रैफिक पुलिस और सरकार ने नियमों को बेहद सख्त बना दिया है.
बता दें कि, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और मोटर वाहन अधिनियम के नियमों के मुताबिक यदि कोई नाबालिग सड़क पर गाड़ी चलाता पकड़ा जाता है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी उसके माता-पिता या गाड़ी के मालिक पर तय होती है. चलिए जानते हैं कि इस गलती के लिए कानून में क्या-क्या कड़े प्रावधान और सजा तय की गई है.
लगेगा भारी-भरकम जुर्माना
आपको बता दें कि, अगर आपका नाबालिग बच्चा बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के सड़क पर कार, स्कूटर या बाइक चलाता हुआ पकड़ा जाता है तो मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199A के तहत गाड़ी के मालिक या बच्चे के माता-पिता/अभिभावक पर 25,000 रुपये का भारी-भरकम जुर्माना लगाया जाता है. यह जुर्माना ऑन-द-स्पॉट भरा जा सकता है या इसका चालान सीधे कोर्ट में भेजा जाता है.
3 साल तक की जेल भी हो सकती है
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय कानून के मुताबिक नाबालिग द्वारा किए गए इस अपराध का सीधा जिम्मेदार उसके माता-पिता या अभिभावक को माना जाता है. जुर्माना लगाने के साथ-साथ इसमें 3 साल तक की जेल की सजा का भी कानूनी प्रावधान है. यदि कोर्ट में यह साबित नहीं हो पाता कि बच्चे ने आपकी बिना जानकारी या चोरी-छिपे गाड़ी उठाई थीतो माता-पिता को जेल जाना पड़ सकता है.
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गाड़ी का रजिस्ट्रेशन रद्द
आपको बता दें कि, नाबालिग के गाड़ी चलाने पर न केवल चालान और जेल का खतरा होता है बल्कि जिस वाहन को बच्चा चला रहा था उसका रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट पूरे 1 साल के लिए कैंसिल कर दिया जाता है. इसका मतलब यह है कि आपकी गाड़ी एक साल तक सड़कों पर कानूनी रूप से नहीं चल पाएगी और उसे जब्त भी किया जा सकता है.
बच्चे का 25 साल की उम्र तक नहीं बनेगा लाइसेंस
बता दें कि, इस नियम का सबसे बड़ा नुकसान खुद बच्चे के भविष्य पर भी पड़ता है. अगर कोई नाबालिग सड़क पर गाड़ी चलाता पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत मामला दर्ज होता है.
वहीं, इसके अलावा उस बच्चे के 25 साल की उम्र पूरी होने तक ड्राइविंग लाइसेंस बनने पर पूरी तरह से बैन लगा दिया जाता है. यानी वह 18 साल का होने के बाद भी अगले कई सालों तक आधिकारिक रूप से गाड़ी चलाने का हकदार नहीं बन पाएगा.
बीमा कंपनी नहीं करेगी कोई मदद
आपको बता दें कि, अगर कोई नाबालिग गाड़ी चलाते समय किसी दुर्घटना का शिकार हो जाता है या किसी अन्य व्यक्ति को नुकसान पहुंचाता है तो इंश्योरेंस कंपनियां थर्ड-पार्टी या ओन-डैमेज क्लेम पूरी तरह से खारिज कर देती हैं.
क्योंकि बिना लाइसेंस और नाबालिग द्वारा गाड़ी चलाना गैर-कानूनी है इसलिए एक्सीडेंट में सामने वाली पार्टी को होने वाले भारी-भरकम नुकसान या अस्पताल के इलाज का पूरा खर्च माता-पिता को अपनी जेब से चुकाना पड़ेगा. इस लिए जब तक बच्चा 18 साल का न हो जाए और उसका वैध स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस न बन जाए तब तक उसे भूलकर भी कार या टू-व्हीलर की चाबी न दें.
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