भारत की सबसे बड़ी passenger vehicle निर्माता Maruti Suzuki आने वाले वर्षों में अपनी manufacturing capacity को बड़े स्तर पर बढ़ाने की तैयारी कर रही है. कंपनी का लक्ष्य 2030 तक भारत में सालाना करीब 40 लाख गाड़ियों की production capacity तैयार करना है. FY2025-26 में Maruti ने रिकॉर्ड 23.45 लाख से ज्यादा वाहन बनाए थे, जबकि उसकी मौजूदा चार manufacturing facilities की कुल installed capacity करीब 24 लाख यूनिट सालाना है. 

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कंपनी ने मार्च 2026 में गुजरात के Sanand में पांचवीं manufacturing facility के लिए जमीन भी चिन्हित की है, जिसकी पूरी क्षमता करीब 10 लाख यूनिट सालाना होगी. Maruti का यह विस्तार सिर्फ घरेलू बाजार की मांग पूरी करने के लिए नहीं है, बल्कि भारत को Suzuki के बड़े global manufacturing और export hub के रूप में मजबूत करने की रणनीति का भी हिस्सा है.

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24 लाख से 40 लाख यूनिट तक कैसे पहुंचेगी कंपनी?

Maruti की मौजूदा manufacturing footprint में Gurugram, Manesar, Kharkhoda और Hansalpur शामिल हैं. कंपनी के मुताबिक इन चारों प्लांट की installed capacity करीब 24 लाख यूनिट प्रति वर्ष है. Kharkhoda plant की मौजूदा क्षमता 5 लाख यूनिट है, जिसे आगे बढ़ाकर 10 लाख यूनिट सालाना किया जाना है. वहीं Hansalpur facility भी अब 10 लाख यूनिट सालाना क्षमता तक पहुंच चुकी है. इसके अलावा Sanand में प्रस्तावित नया प्लांट पूरी तरह operational होने पर 10 लाख वाहन सालाना बनाने की क्षमता रखेगा. इन विस्तार योजनाओं के जरिए कंपनी 40 लाख यूनिट के अपने long-term लक्ष्य के करीब पहुंचना चाहती है.

आखिर क्यों बढ़ाना चाहती है Production?

Maruti के इस बड़े capacity expansion के पीछे घरेलू बाजार के साथ-साथ exports भी अहम वजह हैं. Suzuki Motor Corporation भारत को अपनी global manufacturing और export strategy में ज्यादा महत्वपूर्ण बनाना चाहती है. कंपनी की योजना भारत से जापान और यूरोप समेत दूसरे markets में ज्यादा vehicles भेजने की है. इसके अलावा Maruti आने वाले वर्षों में नए models और खासकर SUVs की संख्या बढ़ाने की तैयारी में है. कंपनी ने अगले कुछ वर्षों में करीब सात नई SUVs लाने की योजना बताई है. ज्यादा models और बढ़ती production क्षमता से कंपनी को अलग-अलग segments में अपनी मौजूदगी मजबूत करने और domestic तथा export demand को पूरा करने में मदद मिल सकती है.

40 लाख का मतलब सिर्फ ज्यादा कारें बनाना नहीं

Maruti का expansion केवल production numbers बढ़ाने तक सीमित नहीं है. Suzuki की नई technology strategy के तहत 2030 तक manufacturing efficiency में भी बड़ा सुधार करने का लक्ष्य है. कंपनी production efficiency को FY20 के स्तर की तुलना में 50 प्रतिशत तक बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है. वहीं vehicle development time को भी कम करने की योजना है, ताकि नए models बाजार में तेजी से लाए जा सकें. इसका मतलब है कि आने वाले वर्षों में Maruti एक साथ capacity, technology और product portfolio तीनों पर काम करेगी.

Suppliers पर भी पड़ेगा बड़ा असर

Production को करीब 40 लाख यूनिट तक ले जाने के साथ supply chain को मजबूत रखना भी जरूरी होगा. इसी वजह से Suzuki ने भारतीय suppliers से production lines को लगातार सातों दिन चलाने के बजाय maintenance के लिए सप्ताह में एक दिन रोकने की दिशा में काम करने को कहा है. Reuters के मुताबिक, सितंबर 2027 तक suppliers को 20 घंटे प्रतिदिन और छह दिन प्रति सप्ताह के operating model की ओर बढ़ने को कहा गया है. इसमें हर दिन करीब चार घंटे machine downtime और सप्ताह में एक पूरा दिन maintenance के लिए रखा जाएगा. इसका उद्देश्य ज्यादा production के दौरान machine breakdown, quality problems और अचानक production stoppage का जोखिम कम करना है.

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