भारत में कई लोगों को बहुत ज्यादा शौक अपनी गाड़ी में मॉडिफिकेशन का होता है. जिसके चलते वह लोग अपनी गाड़ी में कई तरह के बदलाव करवाते हैं. जबकि अभी हमारे देश में यह बहुत लोगों का शौक बन गया है. सरकार ने किसी भी तरह के मॉडिफिकेशन के लिए सख्त मना किया है. लेकिन इसके बाद भी सड़कों पर कई ऐसीं गाड़ियां घूमती हैं जो मॉडिफाई रहती हैं. हालांकि अब जो भी ऐसा करता है तो उसके पर कड़ी कार्यवाही की जा सकती है.
क्योंकि, केरल हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई के दौरान साफ कर दिया है कि सुरक्षा मानकों से खिलवाड़ करने वाले संशोधित वाहनों पर अब किसी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी. तो चलिए जानतें हैं कि केरल हाई कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया है और यह कैसे काम करेगा.
फोटो और वीडियो बनाना हुआ अनिवार्य
बता दें कि केरल हाई कोर्ट के जस्टिस ए. बदरुद्दीन की एकल पीठ ने मोटर दुर्घटना दावों और जांच प्रक्रियाओं से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. अदालत ने साफ आदेश दिया है कि अब से जब भी कोई पुलिस अधिकारी या एमवीआई किसी दुर्घटना स्थल का निरीक्षण करेगा तो उसे वाहन में किए गए किसी भी अवैध बदलाव की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी करनी होगी.
जबकि फोटो और वीडियो एविडेंस को बाकायदा एक्सीडेंट इंस्पेक्शन रिपोर्ट यानी फॉर्म-54 का हिस्सा बनाया जाएगा. इससे अदालत और इंश्योरेंस कंपनियों को यह साफ पता चल सकेगा कि दुर्घटना के समय गाड़ी में कानून के खिलाफ कौन-कौन से बदलाव किए गए थे.
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मॉडिफिकेशन से बढ़ रहा है एक्सीडेंट
वहीं इसके अलावा अदालत ने सुनवाई के दौरान इस बात पर भी गहरी चिंता जताई कि अक्सर लोग अपनी गाड़ियों में बिना किसी इजाजत के बड़े बदलाव करवा लेते हैं. गाड़ियों में तेज आवाज वाले अवैध साइलेंसर, बहुत ज्यादा चौड़े टायर्स, आफ्टर-मार्केट एलईडी लाइटें और भी कई चीजें लगवाए जा रहे हैं.
कोर्ट का मानना है कि यह बदलाव न केवल गाड़ी के संतुलन और ब्रेकिंग सिस्टम को बिगाड़ते हैं बल्कि सड़क पर चलने वाले अन्य निर्दोष चालकों के लिए भी जानलेवा साबित होते हैं. हाई कोर्ट ने कहा कि इस तरह के बदलाव मोटर वाहन अधिनियम के कड़े नियमों का सीधा उल्लंघन हैं और इनसे सड़क सुरक्षा को बहुत भारी खतरा पहुंचता है.
कोर्ट ने लगाई फटकार
जानकारी दें दे कि अदालत ने मोटर वाहन विभाग के अधिकारियों और इंस्पेक्टरों की ढिलाई पर भी भारी नाराजगी जताई है. कोर्ट ने कहा कि कई बार दुर्घटनाओं की जांच के दौरान अधिकारी वाहनों में मौजूद अवैध बदलावों को अपनी रिपोर्ट में नजरअंदाज कर देते हैं या उनका जिक्र तक नहीं करते हैं.
इस लापरवाही की वजह से ऐसे वाहन बेधड़क सड़कों पर दौड़ते रहते हैं. हाई कोर्ट ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि अब किसी इंस्पेक्टर ने दुर्घटना रिपोर्ट में अवैध मॉडिफिकेशन की बात को छुपाया या सही फोटो व वीडियो नहीं बनाया तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी.
अब कटेगा मोटा चालान
आपको बता दें कि हाई कोर्ट के इस नए आदेश के बाद अब अवैध रूप से मॉडिफाई की गई गाड़ियों के मालिकों के ऊपर कड़ी कार्यवाही की जाएगी. पहली बात तो यह है कि पकड़े जाने पर पुलिस अब भारी-भरकम चालान काटेगी और गाड़ी का रजिस्ट्रेशन भी रद्द किया जा सकता है.
जबकि दूसरी और सबसे बड़ी बात यह है कि यदि कोई अवैध रूप से मॉडिफाई गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त होती है तो फोटो और वीडियो सबूत के आधार पर बीमा कंपनियां इंश्योरेंस क्लेम देने से साफ इंकार कर सकती हैं.
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