जब भी हम कोई नई गाड़ी खरीदने जाते हैं, तो मन में एक नई तरह कि खुशी और उत्साह होता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि शोरूम में जो कार आपको बिल्कुल नई बताकर बेची जा रही है, वो सच में कितनी नई है? दरअसल, कार का निर्माण होने की तारीख और उसे खरीदने की तारीख में कई बार महीनों का, और कभी-कभी तो सालों तक का फर्क हो सकता है. और कई लोगों की शिकायत बनी होती है कि उन्होंने कुछ महीनों पहले ही गाड़ी खरीदी और उनकी गाड़ी उस तरह से रिस्पॉन्स नहीं कर रही है जिस तरह उसको करनी चाहिए.

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इसके अलावा गाड़ी के मैन्युफैक्चरिंग डेट (How To Check Car Manufacturing Date) का फर्क आपकी गाड़ी की वारंटी, बीमा, और रीसेल वैल्यू पर सीधा असर डालता है. इसलिए गाड़ी खरीदने से पहले उसकी असल उम्र जानना बेहद जरूरी है. ऐसे में सही जानकारी और समझदारी से आप अपने साथ होने वाले धोखे से बच सकते हैं, आइए आपको बताते हैं कैसे.

VIN नंबर से ऐसे जानें गाड़ी की असली उम्र

गाड़ी की असल उम्र जानने का सबसे आसान और भरोसेमंद तरीका है उसका VIN यानी Vehicle Identification Number मतलब कि चेसिस नंबर चेक करना. यह 17 अंकों का एक यूनिक नंबर होता है जो हर गाड़ी में होता है और इसे आमतौर पर डैशबोर्ड के नीचे, दरवाजे की चौखट पर, या इंजन के पास लिखा हुआ होता है. इस नंबर में गाड़ी के बनने का साल लिखा हुआ होता है. बता दें कि इस नंबर का 10वां अक्षर मैन्युफैक्चरिंग ईयर बताता है. इसके अलावा, गाड़ी के अंदर एक मैन्युफैक्चरिंग प्लेट भी लगी होती है जिस पर महीना और साल दोनों लिखे होते हैं. इसे ड्राइवर साइड के दरवाजे के अंदर या बोनट के नीचे देख सकता है. अगर यह तारीख 6 महीने या उससे ज्यादा पुरानी है, तो आपको डीलर से इस बारे में जरूर सूचना देनी चाहिए.

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टायर और बैटरी की तारीख भी जरूर करें चेक

इसके अलावा कुछ गाड़ी के टायर भी उतने जरूरी होते हैं जितना कि गाड़ी के पार्ट्स. इसलिए गाड़ी के टायरों पर बनी तारीख को भी जरूर देखना चाहिए. यह नंबर 4 अंकों का कोड होता है, आइए इसे उदाहरण के साथ समझते हैं. मान लीजिए आपकी गाड़ी के टायर पर ये कोड लिखा है 2322 तो इसका मतलब होगा कि यह 2022 का 23वां हफ्ता में बना है.

अगर टायर भी पुराने निकलें तो यह साफ संकेत है कि गाड़ी काफी समय से शोरूम में खड़ी है. इसके साथ ही बैटरी की तारीख भी चेक करनी चाहिए, क्योंकि पुरानी खड़ी गाड़ियों के टायर के साथ-साथ बैटरी भी कमजोर हो जाती है. इसके अलावा गाड़ी के ओडोमीटर पर किलोमीटर भी देखें. जो गाड़ी वाकई में नई गाड़ी होगी उसमें आमतौर पर 10 से 50 किलोमीटर से ज्यादा नहीं होते, क्योंकि यह सिर्फ फैक्ट्री टेस्टिंग और शोरूम तक लाने के दौरान चलती है. 

पुरानी गाड़ी मिलने पर क्या करें?

अब सवाल यह है कि अगर आपने गाड़ी खरीद ली और फिर आपको पता चले कि गाड़ी पुरानी है तब उस दौरान आप क्या करें? ऐसे में आपको बता दें कि अगर आपकी गाड़ी 3 से 4 महीने पुरानी है तो वो आमतौर पर स्वीकार्य मानी जाती है, लेकिन इससे ज्यादा पुरानी होने पर आप तुरंत डीलर से इसकी कीमत में छूट मांगें और नहीं तो आप गाड़ी को बदलवा भी सकते हैं.

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