दिल्ली एनसीआर में बढ़ते एयर पॉल्यूशन के बीच कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट ने 18 अगस्त की बैठक के बाद नया फैसला लिया है, इसके तहत दिल्ली में 1 जनवरी 2027 से 3,500 किलो तक के नए लाइट गुड्ज वहइक्लेस N1 वाहनों का रजिस्ट्रेशन तभी होगा, जब वे इलेक्ट्रिक हों. यानी इस कैटेगरी में नए पेट्रोल, डीजल और सी एन जी वाहनों की रजिस्ट्रेशन की इजाजत नहीं होगी. यह फैसला मौजूदा सीाएनजी या पेट्रोल डीजल गाड़ियों को तुरंत सड़क से हटाने का आदेश नहीं है.
किस को कम प्रदूषण वाला माना जाता है?
सीाएनजी को लंबे समय से पेट्रोल और खासकर डीजल के मुकाबले ज्यादा क्लीन फ्यूल माना जाता है. खास तौर पर कण पदार्थ यानी हवा में मौजूद बारीक कणों के सीधे उत्सर्जन के मामले में सीाएनजी का प्रदर्शन डीजल से बेहतर रहता है. एक सरकारी प्रदूषण स्टडी में सीाएनजी कार का हवा में मिलने वाले धूल कण और धुआं डीजल कार से कम पाया गया था. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सीाएनजी गाड़ी बिल्कुल पॉल्यूशन नहीं करती है.
यह भी पढ़ें: Xi Jinping Car Features: कितनी ताकतवर शी जिनपिंग की कार, इसमें कौन-कौन से फीचर्स
सीएनजी से भी निकलती है नाइट्रोजन ऑक्साइड
सीाएनजी वाहनों से नाइट्रोजन ऑक्साइड निकलता है. यह गैस हवा की क्वालिटी के लिए फ़िकरमंद है और वातावरण में जाकर सेकेंडरी पार्टिकुलेट मैटर 2.5 बनने में योगदान दे सकती है. कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट के नए फैसले के पीछे इसी तरह के कार्बन डाइऑक्साइड और छोटा कमर्शियल वाहन के कुल पार्टिकुलेट पॉल्यूशन में उनके हिस्से को भी ध्यान में रखा गया है.
कौन ज्यादा प्रदूषण करता है?
इसका एक सीधा जवाब हर गाड़ी के लिए नहीं दिया जा सकता है. क्योंकि गाड़ी का मॉडल, इंजन, भारत स्टेज उएमिशन नॉर्म्स, उसकी हालत और इस्तेमाल से उत्सर्जन बदलता है. सामान्य तौर पर डीजल वाहनों को पार्टिकुलेट मैटर और कार्बन डाइऑक्साइड के मामले में ज्यादा चिंता वाला माना जाता है, जबकि सीाएनजी में PM काफी कम हो सकता है. पेट्रोल और सीाएनजी के बीच भी हर प्रदूषक का आंकड़ा एक जैसा नहीं रहता है. इसलिए सिर्फ सीाएनजी सबसे साफ है कहना भी सही नहीं होता है.
सीएनजी पर भी रोक क्यों?
कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट का फोकस अब सिर्फ पेट्रोल से कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट में जाने पर नहीं, बल्कि इलेक्ट्रिक मालवाहक वाहनों की तरफ शिफ्ट करने पर है. कमीशन के मुताबिक छोटा कमर्शियल वाहन की संख्या कुल मिलाकर काम करने वाले वाहनों में करीब 1.2% है, लेकिन पार्टिकुलेट मैटर के हानिकारक और गंदे पदार्थों को बाहर निकालने में उनका हिस्सा करीब 3.3% है. संख्या कम होने के बावजूद पॉल्यूशन में उनका हिस्सा रैशीओ से ज्यादा है.
किन गाड़ियों पर लागू होगा फैसला?
दिल्ली में 1 जनवरी 2027 से नए N1 कैटेगरी के पेट्रोल, डीजल और सीाएनजी सामान ढोने वाला वाहनों का रजिस्ट्रेशन नहीं होगा. इसके बाद यह नियम स्टेप बाय स्टेपतरीके से एनसीआर के दूसरे इलाकों में भी लागू होगा. गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर में यह बदलाव 1 जुलाई 2027 से लागू होना है.
यह भी पढ़ें: कारों में किन जानवरों का चमड़ा किया जाता है इस्तेमाल? जानें सबकुछ
Car loan Information:
Calculate Car Loan EMI