Hidden Car Expenses: नई कार खरीदना हर किसी के लिए एक बड़ा सपना होता है. शोरूम में कार पसंद करने से लेकर उसकी डिलीवरी लेने तक का अनुभव काफी उत्साह से भरा होता है. लेकिन अक्सर लोग कार की एक्स शोरूम या ऑन रोड कीमत पर ही ध्यान देते हैं और उन खर्चों को नजरअंदाज कर देते हैं जो बाद में हर महीने या हर साल सामने आते हैं. यही वजह है कि कई बार कार खरीदने के कुछ महीनों बाद बजट पर अतिरिक्त दबाव महसूस होने लगता है. 

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कार सिर्फ खरीदने तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसे चलाने और सही हालत में बनाए रखने के लिए भी लगातार खर्च करना पड़ता है. इसलिए अगर आप नई कार खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो उन खर्चों के बारे में पहले से जानकारी होना जरूरी है जो भविष्य में आपकी जेब पर असर डाल सकते हैं.

फ्यूल, इंश्योरेंस और सर्विस का खर्च सबसे बड़ा

कार खरीदने के बाद सबसे नियमित खर्च फ्यूल का होता है. रोजाना इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए यह मासिक बजट का बड़ा हिस्सा बन सकता है. इसके अलावा हर साल इंश्योरेंस रिन्यू कराना भी जरूरी होता है. कार के मॉडल और इंश्योरेंस कवरेज के आधार पर यह रकम हजारों रुपये तक पहुंच सकती है. तीसरा बड़ा खर्च नियमित सर्विस और मेंटेनेंस का होता है. 

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इंजन ऑयल बदलवाना, फिल्टर बदलना और समय-समय पर जरूरी जांच कराना वाहन की अच्छी सेहत के लिए जरूरी है. अगर सर्विसिंग को नजरअंदाज किया जाए तो आगे चलकर और ज्यादा खर्च उठाना पड़ सकता है. इसलिए कार खरीदते समय इन नियमित खर्चों को अपने बजट में शामिल करना बेहद जरूरी है.

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टायर, पार्किंग और अप्रत्याशित रिपेयर भी रखते हैं महत्व

कई लोग टायर बदलने के खर्च को नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि कुछ साल बाद यह एक बड़ा खर्च बन सकता है. अच्छे टायरों का सेट हजारों रुपये में आता है. इसके अलावा शहरों में रहने वाले लोगों के लिए पार्किंग शुल्क भी अतिरिक्त खर्च बन सकता है. कई रिहायशी और कमर्शियल इलाकों में पार्किंग के लिए अलग से भुगतान करना पड़ता है. 

वहीं अप्रत्याशित रिपेयर खर्च भी कभी भी सामने आ सकते हैं. बैटरी खराब होना, ब्रेक सिस्टम में दिक्कत आना या किसी पार्ट का अचानक बदलना बजट बिगाड़ सकता है. इसलिए कार खरीदने से पहले सिर्फ कीमत नहीं, बल्कि उसके लंबे समय तक होने वाले कुल खर्च का भी आकलन करना चाहिए. सही योजना के साथ कार का मालिक बनना ज्यादा आसान और आर्थिक रूप से समझदारी भरा फैसला साबित हो सकता है.

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