भारत में इलेक्ट्रिक कारों की मांग लगातार बढ़ती जा रही है, लेकिन ज्यादातर लोगों के लिए इनकी सबसे बड़ी परेशानी ऊंची कीमत होती है. किसी भी इलेक्ट्रिक गाड़ी की कुल कीमत में बैटरी का हिस्सा सबसे महंगा होता है. इसी समस्या को हल करने के लिए अब कई कंपनियां Battery-as-a-Service यानी BaaS मॉडल लेकर आ रही हैं.

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इस सिस्टम में ग्राहक को कार खरीदते समय बैटरी की पूरी कीमत नहीं चुकानी पड़ती. वह केवल कार खरीदता है और बैटरी के लिए अलग से महीने या प्रति किलोमीटर के हिसाब से भुगतान करता है. इससे इलेक्ट्रिक कार की शुरुआती कीमत काफी कम हो जाती है और ज्यादा लोग EV खरीदने के बारे में सोच सकते हैं.

क्या है BaaS मॉडल?

भारत में ऐसी कई इलेक्ट्रिक कारें हैं जो BaaS मॉडल की वजह से पहले के मुकाबले काफी सस्ती हो गई हैं. इस योजना का सबसे बड़ा फायदा यह है कि ग्राहक को एक साथ बड़ी रकम खर्च नहीं करनी पड़ती. उदाहरण के तौर पर जिस कार की कीमत 10 से 15 लाख रुपये हो सकती है, वही BaaS मॉडल में कई लाख रुपये सस्ती दिखाई देती है क्योंकि बैटरी की लागत अलग कर दी जाती है. बाद में ग्राहक उपयोग के हिसाब से बैटरी की फीस देता है.

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EV खरीदने वालों के लिए शानदार ऑप्शन

इन कारों में सबसे ज्यादा चर्चा MG Comet EV की है. यह भारत की सबसे किफायती इलेक्ट्रिक कारों में गिनी जाती है. BaaS मॉडल के साथ इसकी शुरुआती कीमत काफी कम हो जाती है, जिससे यह पहली बार EV खरीदने वालों के लिए शानदार ऑप्शन बनती है. यह छोटी और कॉम्पैक्ट कार खासतौर पर शहर में रोजाना चलाने के लिए बनाई गई है. कम जगह में पार्किंग और कम खर्च इसकी बड़ी खासियत है. हालांकि बैटरी के लिए अलग से प्रति किलोमीटर फीस देनी पड़ती है.

इसके अलावा Windsor EV भी BaaS मॉडल के साथ मौजूद है. इस तरह की कारों में ग्राहक कम शुरुआती कीमत देकर बड़ी और ज्यादा फीचर वाली EV खरीद सकता है. इससे उन लोगों को फायदा मिलता है जो एक साथ ज्यादा पैसे नहीं देना चाहते लेकिन इलेक्ट्रिक कार का अनुभव लेना चाहते हैं. 

यूज के हिसाब से देनी पड़ती है फीस

BaaS मॉडल केवल कीमत कम करने का तरीका नहीं है, बल्कि EV अपनाने की रफ्तार बढ़ाने का एक नया तरीका बनता जा रहा है. कई ग्राहक बैटरी की लंबी परफॉर्मेंस और उसके रिप्लेसमेंट खर्च को लेकर चिंतित रहते हैं. BaaS में बैटरी कंपनी की जिम्मेदारी में रहती है, इसलिए ग्राहकों की चिंता कुछ हद तक कम हो सकती है.

हालांकि इस मॉडल के कुछ नुकसान भी हैं. कार खरीदते समय कीमत कम जरूर लगती है, लेकिन बाद में बैटरी यूज के हिसाब से लगातार फीस देनी पड़ती है. अगर कोई शख्स बहुत ज्यादा ड्राइव करता है तो लंबे समय में यह खर्च बढ़ सकता है. यही कारण है कि कुछ लोग BaaS को कम शुरुआती लागत वाला ऑप्शन मानते हैं, जबकि कुछ लोग पूरी बैटरी के साथ कार खरीदना बेहतर समझते हैं. 

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