पेट्रोल और डीजल गाड़ियों के बीच अब मार्केट में इलेक्ट्रिक गाड़ी अपनी दबदबा बना रही है. लेकिन कई लोग अभी भी इलेक्ट्रिक गाड़ी की रेंज और चार्जिंग टाइम को लेकर शिकायत करते रहते हैं. लेकिन अब यह शिकायत बहुत जल्द दूर हो जाएगी. क्योंकि, चीनी ऑटोमोबाइल दिग्गज गीली ने एक ऐसी जबरदस्त टेक्नोलॉजी पेश कर दी है. जिसने पूरे ग्लोबल ऑटो मार्केट में हलचल मचा दी है. गीली ने अपने नए 2.25 मेगावाट स्मार्ट चार्जिंग सिस्टम को रिवील किया है.

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यह तकनीक किसी भी कंपैटिबल इलेक्ट्रिक वाहन की बैटरी को महज 4 मिनट 30 सेकंड में 10 प्रतिशत से 70 प्रतिशत तक चार्ज कर सकती है. आपको बता दें कि, 10% से 97% तक चार्ज होने में इसे सिर्फ 8 मिनट 40 सेकंड का समय लगता है. यह उपलब्धि ऐसे समय में सामने आई है जब बीवायडी और सीएटीएल जैसी दिग्गज कंपनियां भी अल्ट्रा-फास्ट चार्जिंग की दौड़ में एक-दूसरे को पछाड़ने में जुटी हैं. चलिए विस्तार से जानतें हैं पूरी खबर क्या है.

2.25 मेगावाट अल्ट्रा-पावरफुल चार्जिंग नेटवर्क

आपको बता दें कि, गीली का नया चार्जिंग सेटअप 2.25 मेगावाट की पीक चार्जिंग पावर देने में सक्षम है. यह क्षमता प्रेजेंट टाइम में अमेरिका या यूरोप में मौजूद सबसे तेज चार्जिंग स्टेशनों से कई गुना अधिक है. जहां 10% से 80% चार्ज होने में आज भी लगभग 20 से 40 मिनट लग जाते हैं.

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कंपनी ने इस अल्ट्रा-फास्ट तकनीक का सफल परीक्षण अपने प्रीमियम ब्रांड्स लिंक एंड को और जीकर के मॉडल्स पर किया है. इतने कम समय में भारी मात्रा में ऊर्जा ट्रांसफर करके गीली ने चार्जिंग स्पीड के नए वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया है.

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AI करेगी पुरे सिस्टम को कंट्रोल

जानकारी के लिए बता दें कि, इतनी तेज रफ्तार से बैटरी में बिजली फ्लो करने पर सबसे बड़ा खतरा ओवरहीटिंग और बैटरी डिग्रेडेशन का होता है. लेकिन इस खतरे से निपटने के लिए गीली ने रियल-टाइम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम तैनात किया है.

यह AI मॉडल चार्जिंग के दौरान बैटरी का तापमान 30 सेकंड पहले ही भांप लेता है और पावर फ्लो को डायनामिकली एडजस्ट करता है. इससे पूरी चार्जिंग प्रक्रिया के दौरान बैटरी का औसत तापमान 55 डिग्री सेल्सियस से नीचे बना रहता है. जिससे आग लगने या आंतरिक नुकसान का खतरा पूरी तरह टल जाता है.

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इस तकनीक से बढ़ेगी बैटरी की लाइफ

वहीं, अक्सर अल्ट्रा-फास्ट चार्जिंग से बैटरी की लाइफ साइकिल घटने की शिकायतें सामने आती हैं. गीली ने इस समस्या का हल ढूंढ निकाला है अल्ट्रा शॉर्ट ब्लेड बैटरी और पल्स रिस्टोरेशन तकनीक के जरिए निकाला है. चार्जिंग स्टेशन से निकलने वाले माइक्रो-पल्स करंट्स तेजी से चार्जिंग के दौरान एनोड पर जमा होने वाले लिथियम आयनों को दोबारा सक्रिय कर देते हैं. कंपनी का दावा है कि इस एडवांस्ड कूलिंग और पल्स मैनेजमेंट के संयोजन से बैटरी की साइकिल लाइफ सामान्य से 20 प्रतिशत तक बढ़ जाती है.

चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से होगा विस्तार

बता दें कि, सिर्फ तकनीक बनाना ही काफी नहीं है बल्कि इसे आम ग्राहकों तक पहुंचाना असली चुनौती है. गीली ने ऐलान किया है कि वह 2027 के अंत तक चीन भर में 1,00,000 से अधिक चार्जिंग गन्स तैनात करने का लक्ष्य लेकर चल रही है.

इनमें से आधे से अधिक चार्जिंग पॉइंट्स नए स्मार्ट चार्जिंग फीचर्स से लैस होंगे. कंपनी का यह कदम सीधे तौर पर BYD के उस नेटवर्क को टक्कर देने के लिए है. जो 2028 तक 90,000 सुपरफास्ट चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना पर काम कर रहा है.

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