Ethanol Powered EV Charger: अपने देश में इलेक्ट्रिक गाड़ियों को लेकरलोग अब जागरूक हो रहे हैं और इन गाड़ियों को खूब खरीद रहे हैं. जबकि सरकार भी इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बढ़ाया देने के लिए सब्सिडी दे रहे है. लेकिन इलेक्ट्रिक गाड़ियों के चार्जिंग को लेकर अभी भी दिक्कत बनी हुई है. क्योंकि, हाईवे और लॉन्ग रूट पर अभी चार्जिंग स्टेशन की कमी है. लेकिन अब इस समस्या का एक बहुत ही अनोखा और क्रांतिकारी समाधान खोज निकाला गया है. 

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बता दें कि, तेलंगाना में देश का पहला ऐसा ईवी चार्जिंग सिस्टम पेश किया गया है जो पारंपरिक बिजली ग्रिड पर निर्भर नहीं रहेगा. केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी की मौजूदगी में लॉन्च किया गया यह सिस्टम बिजली के बजाय एथेनॉल की मदद से इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करेगा. यह नया तरीका भारत में क्लीन एनर्जी और बायोफ्यूल के इस्तेमाल को एक नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है. चलिए जानतें हैं कि यह तकनीक कैसे काम करती है और इसके क्या फायदे हैं.

कैसे काम करता है यह चार्जर?

बता दें कि, आम तौर पर फास्ट ईवी चार्जिंग स्टेशन को चलाने के लिए भारी पावर ग्रिड और हाई-वोल्टेज बिजली कनेक्शन की जरूरत होती है. लेकिन तेलंगाना में पेश किया गया यह 150kW का फास्ट ईवी चार्जर इस पुरानी परंपरा को पूरी तरह खत्म कर देगा.

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इस सिस्टम के अंदर एथेनॉल से बिजली बनाने वाली एक खास मशीन लगी होती है. यह मशीन पहले बायोफ्यूल यानी एथेनॉल का इस्तेमाल करके मौके पर ही बिजली तैयार करता है और फिर उसी जनरेट की गई बिजली से गाड़ियों की बैटरी को तेजी से चार्ज करता है. यानी यह गाड़ी को मिलने वाली बिजली का स्रोत बदल देता है जिससे ग्रिड का झंझट खत्म हो जाता है.

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72 घंटे में तैयार हो सकेगा चार्जिंग स्टेशन

आपको यह भी बता दें कि, इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन बनाने के लिए जगह तय करने से लेकर ट्रांसमिशन लाइन बिछाने, बिजली विभाग से मंजूरियां लेने और हाई-पावर ट्रांसफॉर्मर लगाने में महीनों का समय निकल जाता है. वहीं इस नई एथेनॉल-बेस्ड मोबाइल चार्जिंग यूनिट का सबसे बड़ा फायदा इसकी तेज इंस्टॉलेशन है. 

कंपनी का दावा है कि इस पूरे सेटअप को किसी भी जगह पर सिर्फ 72 घंटे यानी तीन दिनों के भीतर चालू किया जा सकता है. इस तकनीक की वजह से चार्जिंग स्टेशन लगाने में लगने वाला समय और शुरुआती खर्च 50 फीसदी तक कम हो जाता है. जिससे हाईवे पर चार्जिंग का नेटवर्क तेजी से फैलाया जा सकेगा.

किसानों को मिलेगा फायदा

बता दें कि, इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा भारत के ग्रामीण अर्थशास्त्र और किसानों से जुड़ा हुआ है. एथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने, मक्के और कृषि अवशेषों से किया जाता है. जब चार्जिंग स्टेशनों में एथेनॉल की खपत बढ़ेगी तो इससे देश के किसानों के लिए अतिरिक्त कमाई के रास्ते खुलेंगे और फसल के सही दाम मिलेंगे. 

इसके साथ ही विदेशी कच्चे तेल और पेट्रोलियम पर भारत की निर्भरता कम होगी, जिससे देश का काफी पैसा बचेगा. कुल मिलाकर, यह इथेनॉल चार्जर तकनीक आने वाले समय में ग्रीन मोबिलिटी और भारतीय कृषि दोनों के लिए एक बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकती है.

बनेगा बेहतरीन और हरा-भरा विकल्प

जानकारी के लिए बता दें कि, अक्सर दूरदराज के इलाकों या आपातकालीन स्थितियों में बिजली न होने पर लोग ईवी चार्जिंग के लिए डीजल जनरेटर का सहारा लेते हैं. जो काफी प्रदूषण फैलाते हैं. यह नया एथेनॉल आधारित सिस्टम डीजल जनरेटर का एक बेहद साफ और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प बनकर उभरा है. 

आंकड़ों के मुताबिक यह तकनीक डीजल जनरेटरों के मुकाबले कार्बन उत्सर्जन में लगभग 80 प्रतिशत तक की कमी लाती है. इसे आसानी से एक गाड़ी पर लादकर कहीं भी ले जाया जा सकता है. जिससे हाईवे पर अगर किसी कार की बैटरी खत्म हो जाए तो यह मोबाइल चार्जर वहां पहुंचकर तुरंत मदद पहुंचा सकता है.

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