हमारे देश में अब सरकार ने E100 फ्यूल को मंजूरी दे दी है और अब ऑटोमोबाइल मार्केट में इसकी जमकर चर्चा चल रही है. भारत में अभी E20 ही सभी गाड़ियां में चल रही थी. लेकिन अब E100 के आने के बाद से मार्केट पूरी तरह से बदल सकता है. एथेनॉल से अब विदेशी कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता कम होगी और आम आदमी की जेब पर पड़ने वाला फ्यूल का भारी-भरकम बोझ भी काफी हद तक कम हो जाएगा.
बता दें कि मारुति सुजुकी, टोयोटा और टाटा जैसी बड़ी कार कंपनियां देश के अलग-अलग प्लांट्स में बड़े पैमाने पर फ्लेक्स-फ्यूल इंजन वाली गाड़ियां तैयार करने में जुट गई हैं. अगर आप भी सोच रहे हैं कि इस नई तकनीक से आपकी गाड़ी पर क्या असर पड़ेगा और बाजार में कौन-कौन से ऑप्शन आने वाले हैं. तो यह खबर आपके लिए बहुत काम की है. चलिए जानते हैं कि कौन सी कंपनियां कितनी गाड़ियां बना रही हैं.
भारत में कितनी हैं फ्लेक्स-फ्यूल कार?
आपको बता दें कि भारतीय बाजार में फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों का सफर अब तेजी से आगे बढ़ रहा है. अभी देश में मारुति सुजुकी ने अपनी वैगन-आर बायोफ्लेक्स को बतौर प्रोटोटाइप और मास-मार्केट ऑप्शन के रूप में लॉन्च किया है. जो E20 से लेकर E100 तक के फ्यूल पर चल सकती है. जबकि इसके अलावा टू-व्हीलर सेगमेंट में हीरो मोटोकॉर्प ने भी फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल तैयार किए हैं.
जबकि मारुति सुजुकी अपनी लोकप्रिय फ्रोंक्स और ब्रेजा के फ्लेक्स-फ्यूल वर्जन उतारने की तैयारी कर रही है. वहीं टोयोटा अपनी मशहूर हाइब्रिड कारों जैसे इनोवा हाईक्रॉस और कोरोला को E100 तकनीक के साथ बड़े पैमाने पर लाने के लिए काम कर रही है. इसके साथ ही टाटा मोटर्स और हुंडई जैसी दिग्गज कंपनियां भी अपनी कॉम्पैक्ट एसयूवी सेगमेंट में 100 प्रतिशत एथेनॉल सपोर्ट करने वाले इंजन बना रही हैं.
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कैसी रहेगी परफॉर्मेंस?
एथेनॉल के आने के बाद से जो सबसे ज्यादा सवाल अभी सबके मन में चल रहा है वह गाड़ी की रफ्तार और पिकअप को लेकर है. फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों में एथेनॉल का इस्तेमाल होने के कारण इनकी परफॉर्मेंस काफी जबरदस्त रहती है. एथेनॉल की ऑक्टेन रेटिंग साधारण पेट्रोल के मुकाबले काफी ज्यादा होती है. जिसका सीधा फायदा इंजन को मिलता है.
जब आप हाईवे पर गाड़ी भगाएंगे तो आपको टॉप-स्पीड में कोई भी कमी महसूस नहीं होगी और कार मक्खन की तरह चलेगी. जबकि इसके अलावा शहर के भारी ट्रैफिक में जब आपको बार-बार गाड़ी रोककर आगे बढ़ानी पड़ती है. तब इसका पिकअप आपको हैरान कर देगा. ज्यादा ऑक्टेन नंबर की वजह से इंजन का कंबशन बहुत सही तरीके से काम करता है.
मेंटेनेंस पर कितना पड़ेगा असर?
मार्केट से जब भी कोई नई गाड़ी खरीदता है तो उसके बाद गाड़ी के मेंटेनेंस का खर्च भी बहुत मायने रखता है. एथेनॉल स्वभाव से थोड़ा नम और मेटल को प्रभावित करने वाला होता है. इसलिए फ्लेक्स-फ्यूल कारों में कंपनियां पहले से ही मजबूत इंतजाम करती हैं. इन गाड़ियों के फ्यूल पंप, फ्यूल लाइन्स और इंजन के अंदरूनी हिस्सों में विशेष स्टेनलेस स्टील और मजबूत रबर का इस्तेमाल किया जाता है ताकि जंग न लगे.
हालांकि आपको अपनी तरफ से बस इतना ध्यान रखना होगा कि इंजन ऑयल और फिल्टर समय पर बदलवाते रहें. यदि आप थोड़ा सा अपनी कार का ध्यान रखेंगे तो सामान्य पेट्रोल कारों के मुकाबले फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों का मेंटेनेंस खर्च लगभग बराबर ही रहेगा और आपको कोई ज्यादा परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी.
जेब पर पड़ने वाला असर
आपको बता दें कि हमारे देश में गाड़ी का फ्यूल खर्च सबसे बड़ा मुद्दा होता है. E100 फ्यूल पूरी तरह देश में बने गन्ने और मक्के से तैयार किया जाएगा. जिसके चलते इसकी कीमत सामान्य पेट्रोल से काफी कम रहने की पूरी उम्मीद है. हालांकि एथेनॉल की एनर्जी डेंसिटी थोड़ी कम होने के कारण गाड़ी के माइलेज में 10 से 15 प्रतिशत की हल्की सी गिरावट आ सकती है.
लेकिन इसके बाद भी देखने तो फ्यूल की खरीद का प्रति लीटर दाम बहुत कम हो जायेगा. इससे सालभर में आपका फ्यूल बिल काफी कम हो जाएगा. कुल मिलाकर यह तकनीक पर्यावरण को बचाने के साथ-साथ आपकी रोजमर्रा की रनिंग कॉस्ट को बहुत हल्का कर देगी और सफर किफायती बन जाएगा.
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