सड़क पर गाड़ी चलाते समय जितना जरूरी इंजन और टायर का सही होना है, उतना ही जरूरी ब्रेकिंग सिस्टम भी है. गाड़ी की रफ्तार को नियंत्रित करने और जरूरत पड़ने पर उसे सुरक्षित तरीके से रोकने की जिम्मेदारी ब्रेक की होती है. आमतौर पर कारों और दोपहिया वाहनों में दो तरह के ब्रेकिंग सिस्टम देखने को मिलते हैं- ड्रम ब्रेक और डिस्क ब्रेक. आपने भी कई बार गाड़ियों के फीचर्स में इन दोनों के नाम सुने होंगे. कुछ वाहनों में आगे डिस्क और पीछे ड्रम ब्रेक दिए जाते हैं, जबकि महंगी और परफॉर्मेंस वाली गाड़ियों में चारों पहियों पर डिस्क ब्रेक भी मिलते हैं.
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ब्रेक पैडल दबाते ही पहियों की तेज रफ्तार अचानक कैसे कम हो जाती है? इसके पीछे फ्रिक्शन का प्रिंसिपल काम करता है. ड्रम और डिस्क ब्रेक दोनों ही इसी प्रिंसिपल पर आधारित हैं, लेकिन इनकी बनावट और काम करने का तरीका अलग-अलग होता है.
ऐसे काम करता है ड्रम ब्रेक
ड्रम ब्रेक एक ऐसा ब्रेकिंग सिस्टम है, जिसका इस्तेमाल लंबे समय से कारों और दोपहिया वाहनों में किया जा रहा है. इसमें पहिए के साथ एक गोलाकार धातु का ड्रम घूमता है. इस ड्रम के अंदर ब्रेक शूज, स्प्रिंग और व्हील सिलेंडर जैसे पार्ट्स लगे होते हैं. जब ड्राइवर ब्रेक पैडल दबाता है, तो मास्टर सिलेंडर के जरिए ब्रेक फ्लुइड में हाइड्रोलिक प्रेशर बनता है. यह दबाव पहिए में लगे व्हील सिलेंडर तक पहुंचता है. व्हील सिलेंडर के पिस्टन बाहर की ओर धक्का देते हैं, जिससे ब्रेक शूज ड्रम की अंदरूनी सतह से टकराने लगते हैं. शूज और ड्रम के बीच पैदा होने वाला फ्रिक्शन पहिए की घूमने की गति को कम करता है. इसी वजह से गाड़ी धीमी होकर रुक जाती है. जब ड्राइवर ब्रेक पैडल छोड़ता है, तो रिटर्न स्प्रिंग ब्रेक शूज को वापस उनकी पुरानी स्थिति में ले आती हैं.
यह है डिस्क ब्रेक का मैकेनिज्म
डिस्क ब्रेक की बनावट ड्रम ब्रेक के मुकाबले अलग होती है. इसमें पहिए के साथ एक चपटी गोल धातु की प्लेट लगी होती है, जिसे ब्रेक रोटर या डिस्क कहते हैं. इसके दोनों तरफ ब्रेक पैड लगे होते हैं, जिन्हें कैलिपर अपनी जगह पर पकड़कर रखता है. जैसे ही ड्राइवर ब्रेक पैडल दबाता है, हाइड्रोलिक प्रेशर के कारण कैलिपर के अंदर मौजूद पिस्टन आगे बढ़ते हैं. ये पिस्टन ब्रेक पैड को घूमती हुई डिस्क के दोनों तरफ दबाते हैं. इससे फ्रिक्शन पैदा होता है और डिस्क की गति कम होने लगती है. डिस्क पहिए से जुड़ी होती है, इसलिए पहिया भी धीमा होकर रुक जाता है. ब्रेक पैडल छोड़ने पर हाइड्रोलिक दबाव कम हो जाता है और पैड डिस्क पर दबाव डालना बंद कर देते हैं.
यह भी पढ़ें: V2H Technology: क्या इलेक्ट्रॉनिक कार से घर का पंखा और लाइट जला सकते हैं, जान लीजिए जवाब?
ड्रम और डिस्क ब्रेक में अंतर
दोनों ब्रेक का मुख्य काम गाड़ी को रोकना है, लेकिन इनकी क्षमता और बनावट में कुछ अंतर होते हैं. डिस्क ब्रेक खुले डिजाइन के होते हैं. इसलिए ब्रेक लगाने के दौरान पैदा होने वाली गर्मी आसानी से बाहर निकल जाती है. वहीं ड्रम ब्रेक बंद आकार में होते हैं, जिससे गर्मी बाहर निकलने में ज्यादा समय लगता है. लगातार और तेज ब्रेकिंग के दौरान डिस्क ब्रेक आमतौर पर बेहतर प्रदर्शन करते हैं. ड्रम ब्रेक में ज्यादा गर्मी जमा होने पर ब्रेकिंग क्षमता प्रभावित हो जाती है, जिसे ब्रेक फेड कहा जाता है.
गाड़ियों में आगे डिस्क और पीछे ड्रम ब्रेक लगाने की वजह
कई कारों में आगे डिस्क ब्रेक और पीछे ड्रम ब्रेक दिए जाते हैं. इसकी एक बड़ी वजह ब्रेकिंग के दौरान वजन का आगे की तरफ ट्रांसफर होना है. जब गाड़ी धीमी होती है, तो उस पर लगने वाले बल के कारण आगे के पहियों पर ज्यादा भार आता है. इसलिए आगे के पहियों को आमतौर पर ज्यादा ब्रेकिंग क्षमता की जरूरत होती है. हालांकि किस गाड़ी में कौन-सा ब्रेकिंग सिस्टम दिया जाएगा, यह उसके डिजाइन, वजन, इंजन क्षमता और इस्तेमाल पर निर्भर करता है.
यह भी पढ़ें: रोल्स-रॉयस का शोरूम खोलने में कितनी आएगी लागत, क्या है प्रक्रिया?
Car loan Information:
Calculate Car Loan EMI