केंद्र सरकार ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में संशोधन का ड्राफ्ट प्रस्तावित किया है. इसके तहत भविष्य में भारतीय नागरिकों और विदेशी नागरिकों को जारी किए जाने वाले ड्राइविंग लाइसेंस अलग-अलग रंगों में हो सकते हैं. सरकार का मानना है कि रंग के आधार पर लाइसेंस की पहचान आसान होगी और दस्तावेजों की जांच के दौरान अधिकारियों को भी सुविधा मिलेगी. इसके साथ ही लाइसेंस में राष्ट्रीयता समेत कुछ अतिरिक्त जानकारियां दर्ज करने और ऑनलाइन सेवाओं को बेहतर बनाने का भी प्रस्ताव है.

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प्रस्तावित बदलाव सिर्फ लाइसेंस के रंग तक सीमित नहीं हैं. सरकार ड्राइविंग लाइसेंस हासिल करने की प्रक्रिया को ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए ड्राइविंग टेस्ट, जरूरी दस्तावेजों और ऑनलाइन सेवाओं में भी बदलाव पर विचार कर रही है. नए प्रावधान लागू होने के बाद लाइसेंस पर धारक की पहचान से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी दर्ज की जा सकती है. हालांकि फिलहाल ये सभी बदलाव प्रस्तावित हैं और अंतिम नियम लागू होने से पहले सरकार इस पर लोगों से सुझाव और आपत्तियां मांग रही है.

भारतीय और विदेशी नागरिकों के लिए अलग रंग

प्रस्तावित व्यवस्था में ड्राइविंग लाइसेंस पर धारक की राष्ट्रीयता का पता होने की बात सामने आई है. साथ ही भारतीय और विदेशी नागरिकों के लाइसेंस के लिए अलग-अलग रंग निर्धारित किए जा सकते हैं. कुछ रिपोर्टों में भारतीय नागरिकों के लिए केसरिया और विदेशी नागरिकों के लिए नीला रंग प्रस्तावित होने की बात कही गई है. हालांकि इसे अभी एक प्रस्ताव के तौर पर ही देखना बेहतर होगा. इस बदलाव से अधिकारियों के लिए लाइसेंस देखकर उसके धारक की नागरिकता की पहचान करना आसान हो जाएगा.

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लाइसेंस में बढ़ सकती हैं नई जानकारियां

नए प्रस्ताव में ड्राइविंग लाइसेंस पर पहले से अधिक जानकारी दर्ज करने की भी योजना है. इसमें राष्ट्रीयता, ब्लड ग्रुप, मोबाइल नंबर और इमरजेंसी कॉन्टैक्ट जैसी जानकारी शामिल किए जाने का प्रस्ताव है. ऐसी जानकारी आपात स्थिति में उपयोगी साबित हो सकती है और जरूरत पड़ने पर संबंधित व्यक्ति से संपर्क करना आसान हो सकता है. इसके अलावा लाइसेंस से जुड़े दस्तावेजों के नियमों में भी बदलाव प्रस्तावित हैं. उम्र, पता और पहचान साबित करने के लिए स्वीकार किए जाने वाले दस्तावेजों की सूची में कुछ बदलाव किए जा सकते हैं.

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ड्राइविंग टेस्ट भी हो सकता है मुश्किल

सरकार केवल लाइसेंस के कार्ड में बदलाव तक सीमित नहीं रहना चाहती. सुरक्षित ड्राइविंग से जुड़े ट्यूटोरियल या आकलन में पास होने के लिए जरूरी अंक बढ़ाने का प्रस्ताव भी है. मौजूदा 60 परसेंट की जगह पास होने के लिए 75 परसेंट अंक जरूरी किए जा सकते हैं. इससे यह पता चलेगा कि लाइसेंस हासिल करने वाले व्यक्ति को सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों की बेहतर जानकारी हो.

ऑनलाइन सेवाओं को आसान बनाने की तैयारी

ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ी कुछ सेवाओं को ऑनलाइन माध्यम से और सरल बनाने की भी योजना है. आधार ऑथेंटिकेशन के जरिए कुछ ऑनलाइन सेवाओं का इस्तेमाल करने पर शुल्क में छूट का प्रस्ताव रखा गया है. नाम या पता बदलने जैसे आवेदनों के निपटारे के लिए 15 दिन की समय-सीमा तय करने का भी प्रस्ताव सामने आया है. इससे लोगों को आरटीओ कार्यालय के चक्कर कम लगाने पड़ सकते हैं और छोटे बदलावों के लिए प्रक्रिया तेज हो सकती है.

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