इन दिनों इलेक्ट्रिक गाड़ियों की डिमांड बहुत तेजी से बढ़ी है और जब भी किसी लग्जरी इलेक्ट्रिक गाड़ी की बात होती है तो टेस्ला कंपनी का नाम सबसे पहले आता है. अभी हाल ही में टेस्ला ने अपनी उड़ने वाली गाड़ी को लॉन्च किया है. जिसे लेकर हर तरफ चर्चा चल रही है. जबकि इस बीच टेस्ला कंपनी को लेकर एक और बड़ी खबर सामने आई है.
दरअसल कंपनी के मालिक एलन मस्क ने कंपनी के भविष्य पर एक बड़ा ऐलान किया है. क्योंकि मस्क का अगला प्लान साल 2030 तक हर साल लगभग 50 लाख गाड़ियां बेचने और तैयार करने का है. तो चलिए इस खबर में जानतें हैं कि आने वाले समय में ऑटो इंडस्ट्री पर इसका क्या असर पड़ेगा और कंपनी का आखिर टारगेट क्या रहने वाला है.
हर साल 50 लाख गाड़ियां बेचने का लक्ष्य
आपको बता दें कि अभी टेस्ला कंपनी की सालाना गाड़ी बनाने की क्षमता अभी लगभग 18 से 25 लाख वाहनों के आसपास है. जबकि साल 2030 तक इस आंकड़े को दोगुना यानी 50 लाख तक पहुंचाने के लिए टेस्ला को अगले कुछ सालों में अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को लगभग ढाई गुना बढ़ाना होगा.
वहीं ऑटो एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतने कम समय में नए प्लांट्स स्थापित करना और सप्लाई चेन को मजबूत करना एक बड़ा इंजीनियरिंग और कैपिटल चैलेंज साबित हो सकता है. लेकिन टेस्ला के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर वैभव तनेजा का कहना है कि कंपनी की बिक्री फिलहाल मुख्य रूप से उत्पादन क्षमता से सीमित हो रही है.
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AI और फ्यूचर स्ट्रैटेजी पर जोर
जानकारी दें दे कि इस टारगेट को हासिल करने के लिए टेस्ला अब पूरी तरह से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस AI और फुल सेल्फ-ड्राइविंग तकनीक पर फोकस कर रही है. क्योंकि एलन मस्क का मानना है कि आने वाले समय में ऑटोनॉमस ड्राइविंग और एआई तकनीक ही टेस्ला की गाड़ियों की मांग को सबसे ज्यादा रफ्तार देगी.
जबकि कंपनी अपने पारंपरिक कार मैन्युफैक्चरिंग मॉडल के साथ-साथ रोबोटैक्सी और नेक्स्ट-जेनरेशन प्लेटफॉर्म्स पर भी भारी निवेश कर रही है. मस्क का यह भी कहना है कि कम लागत वाली नई गाड़ियों और बेहतर बैटरी टेक्नोलॉजी के आने से उत्पादन की गति तेज होगी जिससे ग्लोबल मार्केट में टेस्ला की पकड़ और अधिक मजबूत हो जाएगी.
क्या टारगेट पूरा करना होगा आसान?
भले ही टेस्ला के मालिक एलन मस्क को अपने इस प्लान पर पूरा भरोसा है और उनका कहना है कि टेस्ला के पास इस लक्ष्य को हासिल करने का अच्छा मौका है. लेकिन कई ऑटो एनालिस्ट्स और मीडिया रिपोर्ट्स इसे लेकर थोड़ी संशय में हैं. उनका मानना है कि दुनिया भर में बढ़ रही प्रतिस्पर्धा और लॉजिस्टिक्स की चुनौतियों के बीच 50 लाख का सालाना आंकड़ा छूना आसान नहीं होगा. लेकिन अब देखना होगा कि क्या कंपनी 2030 तक अपने इस टारगेट को पूरा कर पाती है या नहीं.
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