अगर आप हाईवे पर सफर करते हैं तो आपने FASTag का इस्तेमाल जरूर किया होगा. आज के समय में यह सिर्फ एक सुविधा नहीं, बल्कि जरूरी सिस्टम बन चुका है. टोल प्लाजा पर लंबी लाइन से बचने, कैश रखने की परेशानी खत्म करने और सफर को तेज बनाने के लिए FASTag अहम भूमिका निभाता है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि FASTag भी अलग-अलग प्रकार के होते हैं और इनके रंगों का खास मतलब होता है.

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किस आधार पर तय होता है कलर?

भारत में NHAI और NETC ने वाहनों को अलग-अलग श्रेणियों में बांट रखा है और उसी आधार पर FASTag के कलर तय किए गए हैं. उदाहरण के लिए निजी कार, जीप, वैन और छोटे हल्के कमर्शियल वाहनों के लिए बैंगनी (Violet) रंग का FASTag होता है. हल्के कमर्शियल वाहनों के लिए नारंगी (Orange) रंग दिया जाता है. तीन एक्सल वाले भारी कमर्शियल वाहनों के लिए पीला (Yellow) FASTag होता है, जबकि बस और ट्रक के लिए हरा (Green) रंग इस्तेमाल किया जाता है.

इसके अलावा बड़े मल्टी-एक्सल ट्रकों के लिए गुलाबी (Pink) और सात या उससे ज्यादा एक्सल वाले भारी वाहनों के लिए नीला (Blue) FASTag जारी किया जाता है. वहीं निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाली भारी मशीनों और अर्थमूवर्स के लिए ग्रे या काला रंग निर्धारित किया गया है.

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इसी जगह लगा होना चाहिए फास्टैग

FASTag लगाते समय उसका सही स्थान भी बेहद जरूरी होता है. इसे हमेशा विंडस्क्रीन के अंदर निर्धारित जगह पर लगाना चाहिए ताकि स्कैनर आसानी से पढ़ सके. यदि टैग मुड़ा हुआ हो, खराब हो गया हो या गलत जगह लगा हो तो टोल प्लाजा पर दिक्कत हो सकती है. कई यूजर्स के अनुभव बताते हैं कि विंडस्क्रीन बदलने पर नया FASTag लेना पड़ता है क्योंकि पुराना टैग हटाने के बाद दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.

NHAI ने एनुअल FASTag पास जैसी सुविधाएं शुरू की हैं, जो रोजाना हाईवे पर सफर करने वालों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती हैं. इसके अलावा कुछ प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए नए नियम भी लागू किए गए हैं. हालांकि लोगों को फर्जी वेबसाइट्स और धोखाधड़ी से भी सावधान रहने की जरूरत है, क्योंकि ऑनलाइन FASTag और टोल पास के नाम पर स्कैम के मामले सामने आए हैं.

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