दिल्ली की हवा एक बार फिर खराब श्रेणी में पहुंच चुकी है और प्रदूषण के स्रोतों को लेकर बहस तेज हो गई है. इस बीच सड़कों पर दौड़ने वाली बाइक और स्कूटर भी चर्चा में हैं. दिल्ली के कुल वाहन में दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी करीब 67 परसेंट है, यानी की सड़कों पर चलने वाले वाहनों में हर तीन में से करीब दो वाहन दोपहिया हैं. इतनी बड़ी संख्या के चलते इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. खासकर पुराने और प्रदूषण मानकों का पालन नहीं करने वाले वाहनों से निकलने वाला धुआं स्थानीय वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है.

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दिल्ली के कुल वाहनों में दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी करीब 67 परसेंट होने का मतलब यह नहीं है कि शहर के 67 परसेंट प्रदूषण के लिए बाइक जिम्मेदार हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोपहिया वाहनों का PM2.5 प्रदूषण में योगदान इससे काफी कम बताया गया है. वहीं, हालिया आंकड़ों में दिल्ली में जारी PUCC उल्लंघन के चालानों में दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 77 परसेंट सामने आई है. यह आंकड़ा प्रदूषण इमिशन का नहीं, बल्कि प्रदूषण जांच से जुड़े उल्लंघनों का है.

केवल दोपहिया वाहनों को नहीं योगदान

दिल्ली में परिवहन क्षेत्र की PM2.5 हिस्सेदारी करीब 28 फीसदी आंकी गई थी. इस परिवहन प्रदूषण में ट्रकों की हिस्सेदारी करीब 8 परसेंट, दोपहिया वाहनों की 7 परसेंट, तीनपहिया वाहनों की 5 परसेंट और कारों की करीब 3.4 परसेंट थी. यह आंकड़ा पूरे दिल्ली के PM2.5 प्रदूषण के संदर्भ में है, न कि केवल वाहनों से होने वाले प्रदूषण के संदर्भ में. इसका मतलब है कि बाइक और स्कूटर दिल्ली की हवा में योगदान जरूर करते हैं, लेकिन उन्हें अकेले प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण कहना सही नहीं होगा. प्रदूषण में ट्रक, तीन पहिया, कार, फैक्टरी, धूल भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

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PUCC उल्लंघन के चालान सबसे ज्यादा

इस साल दिल्ली में दोपहिया वाहनों को लेकर एक और आंकड़ा सामने आया है. अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल जारी किए गए Pollution Under Control Certificate यानी PUCC उल्लंघन के चालानों में 77 परसेंट दोपहिया वाहनों के खिलाफ थे. रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि बार-बार नियम तोड़ने वाले वाहनों में कई बाइक और स्कूटर शामिल हैं. यह बताता है कि प्रदूषण प्रमाणपत्र से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने वालों में दोपहिया वाहन बड़ी संख्या में हैं.

दिल्ली में दोपहिया वाहनों की बड़ी संख्या

दिल्ली में दोपहिया वाहनों की बड़ी संख्या सरकार की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी नीति के पीछे एक अहम कारण है. दिल्ली EV Policy 2026 के तहत 1 अप्रैल 2028 से नए पेट्रोल/फॉसिल-फ्यूल दोपहिया वाहनों के रजिस्ट्रेशन को रोकने और नए दोपहिया वाहनों को इलेक्ट्रिक दिशा में ले जाने का प्रावधान किया गया है. सरकार का लक्ष्य 2030 तक दिल्ली के वाहन बेड़े में कम से कम 30 परसेंट इलेक्ट्रिफिकेशन हासिल करना है.

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