हमारे देश में कमर्शियल वाहनों की भीड़ बहुत ज्यादा है. क्योंकि सड़क पर हमें कमर्शियल गाड़ियों बहुत ज्यादा देखने को मिलती है. कमर्शियल गाड़ियों का कारोबार देखने में जितना बड़ा और सही लगता है. लेकिन इसे चलाना उतना ही ज्यादा महंगा और जोखिम भरा साबित होता है. जब भी कोई ट्रक, बस या छोटा कमर्शियल वाहन हाईवे पर लंबा सफर तय करता है तो फ्यूल के खर्च के अलावा एक और चीज ट्रांसपोर्टर्स की जेब पर सबसे भारी पड़ती है वह है टोल-टैक्स.

Continues below advertisement

अगर आप भी यह जानना चाहते हैं कि सड़कों पर माल ढोने वाले इन कमर्शियल वाहनों को चलाने में टोल का कितना खर्चा बैठता है और इसका पूरा गणित क्या है. तो यह रिपोर्ट आपके लिए बहुत काम की साबित होगी.

कैसे लगता है टोल?

बता दें कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के नियमों के अनुसार कमर्शियल गाड़ियों को उनके आकार और वजन के हिसाब से अलग-अलग केटेगरी में बांटा गया है. जिसके आधार पर टोल वसूला जाता है. हल्के कमर्शियल जैसे कि छोटा हाथी या मिनी बस के लिए हर टोल प्लाजा पर औसत शुल्क लगभग डेढ़ सौ रुपये के आसपास बैठता है.

Continues below advertisement

जबकि दूसरी तरफ जब हम भारी ट्रकों या 2-एक्सेल बसों की बात करते हैं तो एक तरफ का टोल शुल्क 250 से 300 रुपये तक पहुंच जाता है. वहीं बड़े और भारी मल्टी-एक्सल वाहनों के लिए यह रेट चार सौ रुपये से अधिक हो जाती हैं.

AI Generated Image

यह भी पढ़ें: गाड़ियों में हर हाल में लगवाना होगा यह पार्ट, नया नियम ला रही सरकार

टोल का पूरा कैलकुलेशन

जानकारी दें दे कि यदि कोई कमर्शियल ट्रक या बस एक स्टेट से दूसरे राज्य से छह सौ किलोमीटर की लंबी दूरी तय करती है. तो रास्ते में कई टोल प्लाजा आते हैं. सामान्य रूट पर चलने वाले एक साधारण ट्रक को यदि दिल्ली से जयपुर या मुंबई से अहमदाबाद जैसे सफर पर भेजा जाए. तो रास्ते के सभी टोल मिलाकर खर्च हजारों में पहुंच जाता है.

एक तरफ के सफर में केवल टोल टैक्स के रूप में ही ट्रांसपोर्टर को बारह सौ से पच्चीस रुपये तक चुकाने पड़ जाते हैं. यदि गाड़ी मल्टी-एक्सल या बहुत भारी कंटेनर है तो यही टोल खर्च बढ़कर 3 से 5 हजार रुपये प्रति ट्रिप तक पहुंच जाता है.

AI Generated Image

पेनल्टी से पड़ता है बिजनेस पर असर

आपको बता दें कि टोल-टैक्स के नियमों में कमर्शियल वाहनों के लिए वजन को लेकर बेहद सख्त नियम बनाए गए हैं. यदि कोई ट्रक अपनी तय क्षमता से ज्यादा सामान लादकर टोल प्लाजा से गुजरता है. तो वहां लगे सेंसर और आधुनिक मशीनें तुरंत उसकी पकड़ कर लेती हैं.

वजन ज्यादा पाए जाने पर सामान्य टोल शुल्क के मुकाबले दो से चार गुना तक भारी पेनल्टी मौके पर ही वसूल ली जाती है. जिससे ड्राइवर की परेशानी बढ़ जाती है. कुल मिलाकर देखें तो कमर्शियल गाड़ियों को सड़क पर दौड़ाना केवल डीजल और मेंटेनेंस का खेल नहीं है बल्कि टोल-टैक्स का यह भारी हिसाब हर ट्रांसपोर्टर के बिजनेस की दिशा तय करता है.

यह भी पढ़ें: ढलान पर कार पार्क कर रहे हैं, भूलकर भी न करें ये गलती


Car loan Information:

Calculate Car Loan EMI